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महाराष्ट्र: भीमाशंकर अभयारण्य में पेड़ों की अवैध कटाई पर वन विभाग ने दी सफाई

Published: Mon, 26 Oct 2026 09:37 PM (IST)

वन विभाग ने पुणे के भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य में किसी कंपनी की परियोजना के लिए अवैध पेड़ कटाई के आरोपों को खारिज किया है।

पेड़ों की अवैध कटाई पर वन विभाग ने दी सफाई।

पेड़ों की अवैध कटाई पर वन विभाग ने दी सफाई।

HighLights

  1. वन विभाग ने अवैध पेड़ कटाई के आरोप खारिज किए।

  2. परियोजना अभयारण्य से काफी दूर, सीएम ने बताया।

  3. विपक्ष ने पर्यावरण नुकसान और लाभ पर सवाल उठाए।

राज्य ब्यूरो, मुंबई। महाराष्ट्र के पुणे स्थित भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य में एक कंपनी की परियोजना के लिए अवैध रूप से पेड़ों की कटाई किए जाने के आरोपों को वन विभाग ने खारिज किया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अभयारण्य में किसी भी कंपनी की परियोजना के लिए अवैध रूप से पेड़ नहीं काटे जा रहे हैं।

पुणे के उप वन संरक्षक (वन्यजीव) केशव वाबले ने एक बयान जारी कर कहा कि अभयारण्य में अवैध रूप से पेड़ों की कटाई किए जाने संबंधी खबरें व्यापक रूप से प्रसारित हो रही हैं। उन्होंने इन खबरों को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए नागरिकों से वन विभाग के स्पष्टीकरण पर ध्यान देने और प्रशासन को सहयोग करने की अपील की।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी स्पष्ट कर चुके हैं कि प्रस्तावित पंप्ड स्टोरेज परियोजना भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य से 16 किलोमीटर और भीमाशंकर मंदिर से 20 किलोमीटर दूर है।

टोरेंट पावर की प्रस्तावित सैदोंगर-1 पंप्ड स्टोरेज परियोजना पुणे जिले की कर्जत तहसील में विकसित की जानी है। इसकी क्षमता 3000 मेगावाट होगी और इस पर 13,505 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है। परियोजना का उद्देश्य बिजली ग्रिड की स्थिरता बढ़ाने के साथ राज्य और अन्य क्षेत्रों की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना है।

दूसरी ओर विपक्षी दल इस परियोजना को पर्यावरण के लिए नुकसानदेह बता रहे हैं। कांग्रेस ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि गुजरात के उद्यमियों को लाभ पहुंचाने के लिए वन क्षेत्र को साफ किया जा रहा है।

पार्टी ने सवाल उठाया है कि परियोजना के लिए वैकल्पिक बंजर भूमि पर विचार क्यों नहीं किया गया। टोरेंट पावर का कहना है कि परियोजना के सभी घटक अभयारण्य और उसके पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र से बाहर हैं।