मुंबई, ओमप्रकाश तिवारी गुजरात और महाराष्ट्र आज भले ही दो अलग राज्य हों, लेकिन दिसंबर 2023 में अहमदाबाद से मुंबई के बीच बुलेट ट्रेन की शुरुआत हो जाने बाद ये दोनों राज्य एक बार फिर आजादी के पहले की  'बॉम्बे प्रेसीडेंसी' जैसी स्थिति में आ जाएंगे, जब गुजरात और महाराष्ट्र एक ही राज्य का हिस्सा हुआ करते थे।ऐसा व्यावसायिक कारणों से होगा। क्योंकि गुजरात के तीन बड़े व्यावसायिक शहर अहमदाबाद, सूरत और बड़ोदरा की दूरी आर्थिक राजधानी मुंबई से सिर्फ दो से तीन घंटे की हो जाएगी।

आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बन जाएगा पूरा क्षेत्र 

यही नहीं, बुलेट ट्रेन के 12 स्टेशनों के आसपास बहुत बड़े पैमाने पर उद्योग-व्यवसाय लगने के कारण यह पूरा क्षेत्र देश की आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बन जाएगा। बुलेट ट्रेन परियोजना को पूर्ण करने के लिए बनाए गए नेशनल हाई-स्पीड रेल कार्पोरेशन लि. (एनएचएसआरसीएल) के महाप्रबंधक परिचालन पंकज उके के अनुसार बुलेट ट्रेन शुरुआती दिनों में सुबह छह बजे से रात 10 बजे तक अहमदाबाद के साबरमती स्टेशन से मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्टेशन के बीच प्रतिदिन 70 फेरे लगाएगी। यानी 35 फेरे साबरमती से मुंबई की ओर, और 35 फेरे मुंबई से साबरमती की ओर। लेकिन धीरे-धीरे इन फेरों की संख्या बढ़ती जाएगी।

अब तक की योजना के अनुसार 2053 तक फेरों की कुल संख्या 70 से बढ़कर 105 तक हो जाएगी। यानी अभी सुबह-शाम कार्यालयीन अवधि में प्रत्येक 20 मिनट पर दोनों ओर से बुलेट ट्रेन छूटेगी, तो दिन की बाकी अवधि में हर आधे घंटे पर। लेकिन भविष्य में दो फेरों के बीच की अवधि और कम होती जाएगी।

कितना लेगी समय, कहां-कहां रुकेगी

पंकज उके बताते हैं कि शुरुआत में बुलेट ट्रेन 10 डिब्बों की होगी, जबकि 2053 तक यह 16 डिब्बों की हो चुकी होगी। ये बुलेट ट्रेनें दो तरह की होंगी। एक रैपिड, दूसरी रेगुलर। रैपिड यानी अति तीव्र गति वाली। ये ट्रेनें अहमदाबाद से मुंबई पहुंचने में सिर्फ 2.07 घंटे का समय लेंगी, और अपने मार्ग में सिर्फ बड़ोदरा और सूरत में रुकेंगी। जबकि सामान्य बुलेट ट्रेन यही दूरी 2.58 मिनट में तय करेगी, और साबरमती एवं बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स के बीच अन्य सभी 10 स्टेशनों पर भी रुकेगी। बुलेट ट्रेन की गति 220 किमी. प्रति घंटे से 320 किमी. प्रति घंटे के बीच होगी। हालांकि पटरियां 350 किमी. प्रति घंटे की क्षमतावाली बनाई जा रही हैं। पूरी तरह जापानी तकनीक से बनी ये ट्रेनें एक तरफ के अपने अंतिम स्टेशन पर पहुंचने के बाद वहां से रवाना होने के लिए सिर्फ सात मिनट में तैयार हो जाएंगी। इतनी देर में ट्रेन की सीटों का मुंह यात्रा की दिशा की ओर करके उनकी सफाई भी हो चुकी होगी।

 

कितनी सुरक्षित होगी बुलेट ट्रेन

मुंबई से ठाणे के बीच 21 किमी. के भूमिगत एवं समुद्री खाड़ी के नीचे से निकलने वाले सुरंग मार्ग को छोड़ दिया जाए तो 487 किमी. की दूरी यह खंभों पर बने रेलवे ट्रैक (एलीवेटेड) पर पूरी करेगी। चूंकि यह ट्रेन पालघर जैसे भूकंप की आशंका वाले क्षेत्र से गुजरेगी, इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से सभी ट्रेनों में भूकंप का संकेत देने वाले सीसमोमीटर लगाए जाएंगे। ताकि भूकंप का जरा भी संकेत मिलते ही बुलेट ट्रेन पूरी सुरक्षा के साथ अपने स्थान पर रुक जाएगी। जापान में भी ऐसी ही तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है।   

 

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Posted By: Babita kashyap

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