ठाणे: टीवी दिखाने के बहाने मासूम से दरिंदगी करने वाले को 20 साल की कैद, कोर्ट ने बच्ची की गवाही को आधार माना
महाराष्ट्र के ठाणे की विशेष पॉक्सो अदालत ने 5 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के दोषी आकाश बाबूराव थोरात को 20 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
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मासूम से दरिंदगी करने वाले को 20 साल की सजा
HighLights
ठाणे कोर्ट ने दुष्कर्मी को 20 साल की जेल सुनाई।
5 वर्षीय पीड़िता की गवाही को अदालत ने विश्वसनीय माना।
आरोपी आकाश थोरात पर पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई।
डिजिटल डेस्क, ठाणे। महाराष्ट्र के ठाणे की एक विशेष पॉक्सो अदालत ने 5 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के मामले में एक व्यक्ति को 20 साल की जेल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने बच्ची की गवाही पर भरोसा किया और कहा कि बचाव पक्ष यह सबित करने में नाकाम रहा कि बच्ची को कुछ सिखा-पढ़ाकर (ट्यूटर करके) गवाही देने के लिए तैयार किया गया था।
मंगलवार को फैसला सुनाते हुए विशेष अदालत के जज जी.टी. पवार ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने आरोपी, जिसकी पहचान आकाश बाबूराव थोरात के रूप में हुई है, उसके खिलाफ लगे आरोपों को साबित कर दिया है।
कब की है घटना?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना 1 दिसंबर 2019 की दोपहर को हुई थी। उस समय 5 साल की पीड़िता महाराष्ट्र के ठाणे जिले के मुंब्रा इलाके में अपने पड़ोसी के घर खेलने गई थी। आरोपी बच्ची को बहला-फुसलाकर अपने घर ले गया, उसके लिए टीवी चलाया और फिर उसका यौन उत्पीड़न किया।
इसके बाद डरी-सहमी बच्ची घर लौटी और अपनी मां को पूरी घटना बताई। इसके बाद बच्ची की मां ने आरोपी से सवाल-जवाब किए और फिर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जांच के बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की।
आरोपी पर भारतीय दंड संहिता (IPC) और बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण (POCSO) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत आरोप तय किए गए। मुकदमे के दौरान, अभियोजन पक्ष ने तीन मुख्य गवाहों- पीड़िता, उसकी मां और जांच अधिकारी से पूछताछ की, साथ ही दस्तावेजी सबूत भी पेश किए।
पीड़ित बच्ची की गवाही को माना आधार
जज ने कहा, 'पीड़िता की गवाही बहुत विश्वसनीय है। बचाव पक्ष न तो उसकी गवाही को गलत साबित कर पाया और न ही ऐसा कोई सबूत पेश कर सका जिससे यह लगे कि उसे कुछ सिखा-पढ़ाकर तैयार किया गया था। इसलिए, मैं उसकी गवाही पर भरोसा कर रहा हूं।'
अदालत ने जांच की खामियों पर स्पष्ट किया कि गलत जगह का स्पॉट पंचनामा बनने या मेडिकल न होने से मामले पर कोई असर नहीं पड़ता, क्योंकि घटनास्थल से कोई सामग्री बरामद नहीं हुई थी। अदालत ने आरोपी को पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत 20 वर्ष के कठोर कारावास व 5,000 रुपये जुर्माने और आईपीसी की धारा 354A में 3 वर्ष की कैद व 1,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी।
जुर्माने की कुल 6,000 रुपये की राशि पीड़िता को दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) को भी पीड़िता को मुआवजा देने का निर्देश दिया। (समाचार एजेंसी PTI के इनपुट के साथ)
