IIT बॉम्बे छात्र आत्महत्या मामला: सुधींद्र कुलकर्णी ने की प्रोफेसर डूला पर दर्ज SC/ST एक्ट वापस लेने की मांग
आईआईटी बॉम्बे के पूर्व छात्र सुधींद्र कुलकर्णी ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज केस वापस ...और पढ़ें

सुधींद्र कुलकर्णी ने प्रोफेसर डूला पर दर्ज SC/ST एक्ट वापस लेने की मांग की।
HighLights
सुधींद्र कुलकर्णी ने प्रोफेसर डूला पर एससी/एसटी एक्ट केस वापसी मांगी।
उन्होंने एससी/एसटी एक्ट के दुरुपयोग पर राष्ट्रीय बहस की वकालत की।
आईआईटी दिल्ली फैकल्टी फोरम ने भी प्रोफेसर डूला का समर्थन किया।
डिजिटल डेस्क, मुंबई। आईआईटी बॉम्बे के पूर्व छात्र और जाने-माने सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता सुधींद्र कुलकर्णी ने मंगलवार को प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज केस को वापस लेने की मांग की।
उन्होंने कहा कि इस कानून का बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल हुआ है और इसमें सुधार के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बहस होनी चाहिए। उन्होंने साहिल वाकोडे की असामयिक और दर्दनाक मौत पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
साथ ही, उन्होंने इस घटना के बाद कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे प्रोफेसर डूला के प्रति अपना समर्थन जताया है।
आईआईटी के पूर्व छात्रों और फैकल्टी सदस्यों से अपील करते हुए कुलकर्णी ने कहा कि किसी भी छात्र की आत्महत्या बेहद पीड़ादायक होती है, चाहे वह किसी भी जाति, वर्ग या धर्म से हो। हर एक जीवन का जाना देश और परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है।
हालांकि, उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि साहिल की मृत्यु के बाद जिस तरह की परिस्थितियां बनीं, उनमें 'दोषी साबित होने तक निर्दोष' मानने के बुनियादी सिद्धांत की अनदेखी की जा रही है।
कुलकर्णी ने अपनी अपील में कड़े शब्दों में कहा कि आईआईटी और पूरे देश में एससी/एसटी एक्ट के कथित दुरुपयोग को रोका जाना चाहिए। उन्होंने प्रोफेसर डूला पर दर्ज किए गए मामलों को वापस लेने की पुरजोर मांग करते हुए सभी पूर्व छात्रों और शिक्षकों से इस मुश्किल समय में प्रोफेसर के साथ खड़े होने का आह्वान किया है, ताकि निष्पक्षता बनी रहे।
आईआईटी दिल्ली फैकल्टी फोरम ने भी प्रोफेसर डूला का किया समर्थन
आईआईटी दिल्ली फैकल्टी फोरम ने भी प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला का समर्थन किया है। फोरम ने चिंता जताई है कि शीर्ष संस्थानों में निर्णय लेने की प्रक्रिया को 'भीड़-संचालित व्यवहार' द्वारा प्रभावित किया जा रहा है।
संस्थान की ओर से जारी बयान में कहा गया कि प्रोफेसर डूला संस्थान के दिशानिर्देशों के तहत केवल अपनी परीक्षा संबंधी ड्यूटी निभा रहे थे। संगठन ने कहा कि उनके खिलाफ बिना किसी विश्वसनीय सबूत के सार्वजनिक रूप से आरोप लगाए गए हैं। इसने प्रोफेसर, उनके छात्रों और परिवार के प्रति एकजुटता व्यक्त की है।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
