मुंबई, प्रेट्र। नयनतारा सहगल का आमंत्रण रद करने के विवाद में मंगलवार को शिव सेना भी कूद पड़ी। पार्टी ने कहा कि आयोजकों को यह पता चल गया था कि सहगल अपने भाषण में गाय से जुड़ी हिंसा, उन्मादी भीड़ की हिंसा और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग पर बोलेंगी। इसी वजह से उन्होंने सहगल का आमंत्रण रद करके अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और एक लेखक के आत्म सम्मान की हत्या कर दी।

बता दें कि अवार्ड वापसी से चर्चा में आई सहगल को मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस की उपस्थिति में 11 जनवरी को यवतमाल में आयोजित होने वाले 92वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सभा का उद्घाटन करना था, लेकिन एक राजनीतिक संगठन द्वारा सहगल की उपस्थिति का विरोध जताए जाने के बाद आयोजकों ने उन्हें भेजा आमंत्रण वापस ले लिया था।

सरकार की मेहरबानी के लिए आयोजकों ने लिया निर्णय

शिव सेना ने पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में लिखे संपादकीय में दावा किया है कि उद्घाटन के दौरान सहगल ने उन्मादी भीड़ की हिंसा, घृणा की राजनीति, विरोधियों के खिलाफ सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग, पत्रकारों पर राजनीतिक दबाव और लेखकों की हत्याओं पर बोलने का निर्णय लिया था। यह बात उन्होंने पहले ही आयोजकों को बता दी थी।

संपादकीय में कहा गया है कि आयोजकों ने सोचा होगा कि अगर नयनतारा सहगल का आमंत्रण रद कर दिया जाए तो सरकार उन पर मेहरबान हो जाएगी, इसलिए उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और एक लेखक के आत्मसम्मान की हत्या कर दी।

सहगल किसी पार्टी या विचारधारा के खिलाफ नहीं

शिव सेना ने कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी से न डरने वाली नयनतारा सहगल वही महिला हैं, जिन्हें इंदिरा गांधी के खिलाफ बोलने के चलते आपातकाल के दौरान जेल में डाल दिया गया था। इसका मतलब यह हुआ कि वह किसी विचारधारा और पार्टी के खिलाफ नहीं हैं बल्कि वह गलत के खिलाफ हैं।

संपादकीय में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे का भी उल्लेख करते हुए कहा गया है कि उन्हें आमंत्रित करने के खिलाफ उनकी पार्टी को कोई आपत्ति नहीं है। शिव सेना ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि इस मामले में तो मनसे को कठपुतली की तरह इस्तेमाल किया गया है।

Posted By: Sachin Mishra