मुंबई, एएनआइ। महाराष्ट्र में सरकार बनाने की चल रही प्रक्रिया के बीच शिवसेना नेता संजय राउत को सोमवार अपरान्ह लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस बीच, शिवसेना नेता संजय राउत के भाई सुनील राउत ने कहा है कि पिछले 15 दिनों से संजय राउत सीने में दर्द से पीड़ित हैं, लेकिन यह गंभीर नहीं है। उसे रूटीन जांच के लिए भर्ती कराया गया है। मुझे लगता है कि आज शाम उसकी एंजियोग्राफी की जाएगी और वे एक या दो दिन में अस्पताल से वापस आ जाएंगे।

वहीं, इससे पहले मोदी सरकार में शिवसेना कोटे के मंत्री अरविंद सावंत ने मंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया है। इधर, महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सरकार बनाने से इन्कार के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के साथ मिलकर शिवसेना सरकार बनाने की कवायद कर रही है। बताया जाता है कि उद्धव ठाकरे के साथ मिलकर शरद पवार इस संबंध में सोनिया गांधी से संपर्क साध रहे हैं। सोनिया गांधी की सहमति के बाद महाराष्ट्र में राकांपा व शिवसेना गठबंधन की सरकार बन सकती है।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने सबसे पहले भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दिया था। जब भाजपा ने महाराष्ट्र में सरकार बनाने से इन्कार कर दिया तो राज्यपाल ने सरकार बनाने के लिए अब शिवसेना को न्योता दिया। भाजपा द्वारा सरकार बनाने से इन्कार करने के कुछ ही समय बाद राज्यपाल ने राज्य की दूसरी बड़ी पार्टी शिवसेना को यह न्योता दिया।

राज्यपाल ने सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते शनिवार को भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दिया था। शिवसेना के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ी भाजपा 105 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी। रविवार को मुख्यमंत्री निवास पर दो बार हुई भाजपा कोर कमेटी की बैठक हुई। दूसरी बार हुई बैठक को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया। इन बैठकों के बाद भाजपा नेताओं ने राजभवन जाकर राज्यपाल को बता दिया कि बहुमत सिद्ध करने लायक संख्याबल नहीं होने के चलते पार्टी सरकार नहीं बनाएगी।

राज्यपाल से मुलाकात के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने शिवसेना पर जनादेश के अपमान का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य की जनता ने भाजपा-शिवसेना गठबंधन को सरकार बनाने का जनादेश दिया था। पाटिल ने शिवसेना को कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने के लिए शुभकामनाएं भी दी। वहीं, राज्यपाल से न्योता मिलने के बाद शिवसेना में हलचल तेज हो गई। एक होटल में ठहरे पार्टी के नवनिर्वाचित विधायक तुरंत पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के निवास मातोश्री पहुंच गए।

इससे पहले, शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि किसी भी कीमत पर महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री शिवसेना का ही बनेगा। उन्होंने 170 विधायकों के समर्थन का दावा भी किया था। हालांकि, शिवसेना के लिए सरकार बना पाना आसान नहीं है। शिवसेना राकांपा और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बना सकती है। राकांपा के प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा कि शिवसेना ने समर्थन के लिए उससे संपर्क नहीं साधा है। लेकिन अगर वो समर्थन चाहती है तो सबसे पहले उसे राज्य के साथ ही भाजपा के नेतृत्व वाले राजग गठबंधन से अलग होना होगा। वह एक साथ दो गठबंधन का हिस्सा नहीं बनी रह सकती है। शिवसेना के कोटे से मोदी सरकार में अरविंद सावंत मंत्री है। पार्टी अगर राकांपा की शर्त मानती है तो सावंत को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ेगा।

सोनिया करेंगी अंतिम निर्णय

शिवसेना के नेतृत्व में सरकार को समर्थन देने को लेकर कांग्रेस ने भी अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। कांग्रेस के महाराष्ट्र प्रभारी महासचिव मल्लिकार्जुन खड़गे ने कांग्रेस को विपक्ष में बैठने का जनादेश मिलने की बात कहते हुए किसी को समर्थन देने पर अंतिम निर्णय अपने आलाकमान पर छोड़ने की बात कही है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने ये तो कहा है कि कांग्रेस राज्य में स्थिर सरकार चाहती है और हर विकल्प पर विचार कर रही है। लेकिन शिवसेना को समर्थन के मुद्दे पर उन्होंने भी आलाकमान पर फैसला छोड़ने की बात कही। 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा में भाजपा के 105 और शिवसेना के 56 सदस्य हैं। जबकि, राकांपा के 54 और कांग्रेस के सदस्यों की संख्या 44 है। बहुमत के लिए 145 सदस्यों की जरूरत है। 

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Posted By: Sachin Mishra

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