'हमारी पीढ़ी के बच्चे मानसिक रूप से मजबूत थे', IIT बॉम्बे सुसाइड केस में आरोपी प्रोफेसर के समर्थन में कांग्रेस प्रवक्ता
कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने आईआईटी बॉम्बे के एक प्रोफेसर का समर्थन किया है, जिन पर एक छात्र की आत्महत्या के मामले में मानसिक उत्पीड़न का आरोप है।


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, मुंबई। कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने आईआईटी बॉम्बे के उस प्रोफेसर का समर्थन किया है, जिन पर एक बीटेक छात्र को मानसिक रूप से परेशान करने का आरोप लगा है। इस मामले पर अपनी राय रखते हुए उन्होंने कहा कि हमारी पीढ़ी के छात्र मानसिक रूप से ज्यादा मजबूत हुआ करते थे।
यह पूरा विवाद आईआईटी बॉम्बे के ऊर्जा विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग के एक सेकेंड ईयर के छात्र की खुदकुशी के बाद शुरू हुआ, जिसने पिछले शुक्रवार की शाम को कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी।
बताया जा रहा है कि मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान उसे मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था, जिसके बाद छात्र के पिता ने प्रोफेसर पर उनके बेटे को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है।
छात्र के पिता की शिकायत के बाद मुंबई पुलिस ने इस मामले को क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है। पिता ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर और इनविजिलेटर सूर्यनारायण डूला पिछले तीन महीने से उनके बेटे के खिलाफ जातिसूचक टिप्पणियां कर रहे थे। पुलिस ने प्रोफेसर डूला के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।
कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने क्या कहा?
इस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए शमा मोहम्मद ने सोशल मीडिया पर लिखा कि इस आत्महत्या के मामले में मैं प्रोफेसर डूला के साथ खड़ी हूं।
यदि कोई छात्र नकल करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे फटकार लगाना और कमरे से बाहर जाने के लिए कहना एक सामान्य बात है। अगर छात्र को उसकी जाति के कारण प्रताड़ित किया गया था, तो उसे एससी/एसटी विभाग से इसकी शिकायत करनी चाहिए थी।
उन्होंने आगे कहा कि जब हम बच्चे थे, तो हमारी गलतियों के लिए हमारे शिक्षक और माता-पिता हमें डांटते थे, लेकिन हमारी पीढ़ी मानसिक रूप से मजबूत थी।
शमा मोहम्मद ने छात्रों के लिए बेहतर मानसिक स्वास्थ्य सहायता की भी वकालत की। उन्होंने लिखा कि मैं कॉलेजों से अनुरोध करूंगी कि वे छात्रों की भलाई के लिए मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सक रखें।
आईआईटी बॉम्बे के फैकल्टी ने दी स्पष्टीकरण
आईआईटी बॉम्बे के अनुसार, छात्र को परीक्षा हॉल में मोबाइल फोन के साथ पकड़ा गया था और उसने जवाब खोजने के लिए प्रश्न पत्र को चैटजीपीटी पर अपलोड किया था। हालांकि, संस्थान ने स्पष्ट किया कि छात्र के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी।
आईआईटी बॉम्बे फैकल्टी फोरम ने भी प्रोफेसर डूला के प्रति अपना समर्थन जताया है। फोरम का कहना है कि कथित शैक्षणिक नकल का पता चलने के बाद प्रोफेसर केवल संस्थान द्वारा स्वीकृत प्रक्रियाओं का पालन कर रहे थे। उन्होंने इस घटना की सूचना आगे की कार्रवाई के लिए अधिकारियों को दे दी थी।
संस्थान ने बताया कि प्रोफेसर डूला और विभागाध्यक्ष ने छात्र की काउंसलिंग की थी और उसे आश्वासन दिया था कि इस घटना का उसके शैक्षणिक करियर पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके बाद छात्र अपने हॉस्टल के कमरे में लौट गया था, जहां बाद में वह मृत पाया गया।
इस दुखद घटना के बाद से आईआईटी बॉम्बे कैंपस में छात्रों का विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। प्रदर्शनकारी छात्र प्रशासन से इस मामले में जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
यह भी पढ़ें- सुसाइड केस में IIT बॉम्बे के डायरेक्टर ने विरोध कर रहे छात्रों से की मुलाकात, 18 मांगों वाली लिस्ट पर किए साइन
यह भी पढ़ें- IIT बॉम्बे सुसाइड केस में प्रोफेसर के खिलाफ केस दर्ज, परिवार ने जातिगत भेदभाव का लगाया आरोप
