नासिक सिंहस्थ कुंभ मेला: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 31 अक्टूबर को ध्वजारोहण समारोह में होंगी शामिल
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को 31 अक्टूबर को नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेले के ध्वजारोहण समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है।

नासिक सिंहस्थ कुंभ मेले के ध्वजारोहण समारोह में शामिल होंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु।
HighLights
राष्ट्रपति मुर्मु को नासिक कुंभ मेले के लिए आमंत्रित किया गया।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने प्रतिनिधिमंडल के साथ निमंत्रण सौंपा।
कुंभ मेले में गोदावरी आरती और वेबसाइट लॉन्च भी होगा।
राज्य ब्यूरो, मुंबई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्म को 31 अक्टूबर को नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेले के शुभारंभ के उपलक्ष्य में आयोजित ध्वजारोहण समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को राष्ट्रपति भवन में उनसे मुलाकात कर औपचारिक निमंत्रण सौंपा।
महाराष्ट्र सरकार की ओर से जारी बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री फडणवीस ने राष्ट्रपति को नासिक और त्र्यंबकेश्वर में आयोजित होने वाले ध्वजारोहण समारोहों में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। इस अवसर पर उन्हें महाराष्ट्र की आध्यात्मिक परंपराओं, आदिवासी उद्यमशीलता, वस्त्र कला, कृषि समृद्धि और खाद्य संस्कृति को दर्शाने वाले विशेष उपहार भी भेंट किए गए।
राष्ट्रपति को 31 अक्टूबर को होने वाली गोदावरी आरती में शामिल होने के साथ ही नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ मेला प्राधिकरण की वेबसाइट के शुभारंभ के लिए भी आमंत्रित किया गया है। इस दौरान कुंभ मेले के गीत का विमोचन, आयोजन पर आधारित कॉफी टेबल बुक का लोकार्पण और स्मारक डाक टिकट का अनावरण भी प्रस्तावित है।
प्रतिनिधिमंडल में राज्य के मंत्री, पुजारी संघों और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों के अलावा सिंहस्थ कुंभ मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष, संभागीय आयुक्त प्रवीण गेदाम और कुंभ मेला आयुक्त शेखर सिंह शामिल थे।
कलात्मक पॉप-अप डिजाइन में तैयार किया गया निमंत्रण पत्र
राष्ट्रपति को दिया गया निमंत्रण पत्र कलात्मक पॉप-अप डिजाइन में तैयार किया गया है। इसमें कुंभ मेले की पौराणिक उत्पत्ति, आध्यात्मिक महत्ता और भव्यता को दर्शाया गया है। दृष्टि, ध्वनि, गंध, स्वाद और स्पर्श से जुड़े तत्वों के माध्यम से नासिक की सांस्कृतिक विरासत और गोदावरी नदी के महत्व को उकेरा गया है।
उपहार संग्रह में शबरी नेचुरल्स की अगरबत्ती, बाजरा आधारित खाद्य पदार्थ, महुआ के फूल से बने उत्पाद, बांस की वस्तुएं और वन शहद शामिल हैं। इसके अलावा येवला की पैठणी साड़ी, नासिक की काली किशमिश, काजू, पारंपरिक चिवड़ा, मिठाइयां और सूखे मेवे भी भेंट किए गए हैं।
इस पहल के माध्यम से महाराष्ट्र की धार्मिक परंपराओं के साथ उसकी स्थानीय कला, कृषि और आदिवासी उत्पादों को भी प्रदर्शित किया गया है।
