राज्य ब्यूरो, मुंबई। Covishield Vaccine: सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड वैक्सीन के दाम को लेकर महाराष्ट्र के सत्तापक्ष व विपक्ष में रार छिड़ गई है। केंद्र सरकार के लिए कोविशील्ड के दाम कम व राज्यों के लिए ज्यादा रखे जाने पर राकांपा व कांग्रेस ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। महाराष्ट्र की शिवसेनानीत महाविकास अघाड़ी सरकार के मंत्री नवाब मलिक ने सवाल उठाया कि सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा उत्पादित कोविशील्ड वैक्सीन केंद्र सरकार को 150 रुपये में, जबकि राज्य सरकारों को 400 रुपये में क्यों दी जा रही है। खुले बाजार में इसकी कीमत 600 रुपये प्रति खुराक निर्धारित की गई है। मलिक ने पूछा कि इन तीनों दरों में इतना फर्क क्यों है ? अलग-अलग ग्राहकों के लिए अलग-अलग दाम क्यों हैं ? क्या केंद्र को दी जा रही वैक्सीन टैक्स फ्री है ? या राज्य व आम जनता के लिए टैक्स अलग-अलग है क्या ? इनके उत्तर सीरम इंस्टीट्यूट को देना चाहिए। हालांकि सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला ने प्रेस के लिए जारी अपने बयान में तीन विदेशी वैक्सीनों के दाम भी बताए हैं, जो भारत में खुले बाजार के लिए दी जाने वाली कोविशील्ड की तुलना में अधिक ही हैं। इनमें अमेरकी वैक्सीन की कीमत 1500 रुपये व रूस व चीन की वैक्सीनों की कीमत 750 रुपए बताई गई है।

अदार पूनावाला द्वारा जारी इसी प्रेस बयान पर तंज कसते हुए कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी तंज कसा है। उन्होंने अपने ट्वीट में इस बयान पर लिखा है कि आपदा देश की, अवसर मोदी मित्रों का, अन्याय केंद्र सरकार का। उन्होंने अपने दूसरे ट्वीट में भी केंद्र सरकार की वैक्सीन रणनीति पर प्रहार करते हुए लिखा है कि – केंद्र सरकार की वैक्सीन रणनीति नोटबंदी से कम नहीं है। आम जन लाइनों में लगेंगे। धन, स्वास्थ्य व जान का नुकसान झेलेंगे, और अंत में सिर्फ कुछ उद्योगपतियों का फायदा होगा। राहुल गांधी के इस बयान का जवाब देते हुए महाराष्ट्र भाजपा के अध्यक्ष चंद्रकांत दादा पाटिल ने कहा है कि कोरोना ने शायद राहुल गांधी के दिमाग पर असर डाला है, इसीलिए वह अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं। उन्होंने राहुल को भारतीय राजनीति में हास्यरत्न की संज्ञा दी है। राहुल गांधी के इस बयान का जवाब देते हुए पाटिल ने कहा कि राहुल गांधी की यह भूमिका राष्ट्रविरोधी है। वह न केवल कांग्रेस के लिए, बल्कि राष्ट्र के लिए भी बहुत बड़ा खतरा हैं। दरअसल सीरम इंस्टीट्यूट वह भारतीय कंपनी है, जिसने कोरोना की वैक्सीन बनाकर भारत का नाम रोशन किया है। अब तो उसने अपनी वैक्सीन की कीमत को जनता के लिए पारदर्शी भी बना दिया है।

दूसरी ओर, महाराष्ट्र सरकार अपनी वैक्सीन जरूरतों को पूरा करने के लिए विदेश से वैक्सीन आयात करने पर भी विचार कर रही है। राज्य में अब तक 45 वर्ष से अधिक उम्र के 1.32 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। एक मई से 18 वर्ष से ऊपर के लोगों को वैक्सीन लगाने की शुरुआत होने के बाद राज्य में वैक्सीन की और कमी महसूस की जा सकती है। नवाब मलिक के अनुसार राज्य मंत्रिमंडल ने एक समिति बना दी है, जो देश और देश के बाहर भी वैक्सीन की उपलब्धता तलाशेगी। पता चला है कि कोवैक्सीन का निर्माण कर रही हैदराबाद की भारत बायोटेक से भी राज्य सरकार की बात चल रही है। महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे के अनुसार, सीरम इंस्टीट्यूट ने राज्य सरकार को बता दिया है कि वह 24 मई से पहले किसी भी राज्य को वैक्सीन नहीं दे पाएगी, क्योंकि केंद्र के साथ उसने इस आशय का एक करार कर रखा है। इसलिए भी महाराष्ट्र सरकार अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए विदेशी वैक्सीन निर्माताओं से बात करने का विचार कर रही है।