'तकनीकी आधार पर नहीं खारिज कर सकते क्लेम', उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को दिया ₹8.06 करोड़ मुआवजा देने का निर्देश
दक्षिणी मुंबई के जिला उपभोक्ता आयोग ने न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी को विक्टोरिनाक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का ₹8.06 करोड़ का बीमा दावा भुगतान करने का आदेश दिया है।

उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला
HighLights
न्यू इंडिया एश्योरेंस को ₹8.06 करोड़ भुगतान का आदेश
तकनीकी आधार पर बीमा दावा खारिज करना अनुचित
विक्टोरिनाक्स इंडिया के आग से हुए नुकसान का मामला
पीटीआई, मुंबई। दक्षिणी मुंबई के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा दावे को गलत तरीके से खारिज करने के मामले में न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी को 8.06 करोड़ रुपये भुगतान करने का आदेश दिया है।
उपभोक्ता आयोग ने दो सितंबर को दिए आदेश में कहा कि विक्टोरिनाक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के जायज दावे को सिर्फ तकनीकी आधार पर और मशीनी तरीके से खारिज कर दिया गया।
विक्टोरिनाक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी से 'स्टैंडर्ड फायर एंड स्पेशल पेरिल्स पालिसी' ली थी। स्विट्जरलैंड की कंपनी विक्टोरिनाक्स एजी की पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी विक्टोरिनाक्स इंडिया के कस्टम बांडेड गोदाम में फरवरी 2019 में आग लग गई थी, जिसमें काफी सामान जलकर खाक हो गया था।
कस्टम बांडेड वेयरहाउस सरकार द्वारा अधिकृत भंडारण केंद्र होता है, जहां आयातित सामान रखे जाते हैं। शिकायतकर्ता कंपनी ने कहा कि आग बुझाने के लिए वेयरहाउस में मौजूद कर्मचारियों ने सभी जरूरी कदम उठाए। जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट की अग्निशमन सेवाओं की भी मदद ली। तमाम कोशिशों के बावजूद बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ।
बीमा कंपनी द्वारा नियुक्त सर्वेयर ने ₹8,06,49,573 रुपये के कुल नुकसान का आकलन किया था, लेकिन बीमा कंपनी ने जनवरी 2021 में क्लेम को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि कुछ खास इंटरनल एग्रीमेंट और इनवाइस जमा न करके क्लाज छह का उल्लंघन किया गया था।
आयोग ने कहा कि आग लगने से हुए नुकसान का आकलन होने और किसी भी पक्ष द्वारा उस पर आपत्ति नहीं जताने के बावजूद पालिसी की धारा छह का हवाला देकर क्लेम को खारिज करना अनुचित था। सिर्फ प्रक्रियात्मक नियमों का पालन न करने के आधार पर दावा खारिज करना कानूनी रूप से सही नहीं था। इसलिए शिकायतकर्ता ₹8,06,49,573 का इंश्योरेंस क्लेम पाने का हकदार है।
न्यू इंडिया एश्योरेंस को आदेश दिया गया है कि वह शिकायत दर्ज होने की तारीख से नौ प्रतिशत ब्याज का भुगतान करे। बीमा कंपनी को मानसिक परेशानी के लिए 50 हजार रुपये और कानूनी कार्यवाही के खर्च के तौर पर 50 हजार रुपये 45 दिनों के अंदर देने के लिए कहा गया है।
