नासिक के भूजल में मिला जहरीला क्रोमियम, कुंभ से पहले कैंसर वाला केमिकल मिलने से मचा हड़कंप
नासिक के अंबाड़ क्षेत्र में भूजल में कैंसरकारी हेक्सावेलेंट क्रोमियम सुरक्षित सीमा से 1000 गुना अधिक पाया गया है।
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नासिक में कुंभ मेले के पास भूजल में कैंसर वाले तत्व (यह तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है।)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। महाराष्ट्र के नासिक कुंभ मेले वाली जगह के पास स्थित अंबाड़ क्षेत्र में भूजल के अत्यधिक विषैले और दूषित होने का बेहद खतरनाक मामला सामने आया है। साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपल (SANDRP) की जांच रिपोर्ट के अनुसार, यहां के भूजल में कैंसर पैदा करने वाले 'हेक्सावलेंट क्रोमियम' का स्तर सुरक्षित तय सीमा से 1,000 गुना अधिक पाया गया है।
SANDRP के अनुसार, इस दूषित पानी के कारण स्थानीय लोगों को त्वचा व स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यही जहरीला पानी स्थानीय नालों के जरिए गोदावरी नदी में भी मिल रहा है।
SANDRP द्वारा जारी बयान में चेतावनी दी गई है कि नदी का प्रभावित हिस्सा उन्हीं घाटों के अंतर्गत आता है, जहां जल्द ही कुंभ मेले का आयोजन होना है। ऐसे में वहां जुटने वाले लाखों श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा सकता है।
निर्धारित मानक से 1000 अधिक दर्ज किया गया क्रोमियम
रिपोर्ट के अनुसार, भूजल में कुल 50.5 mg/L क्रोमियम दर्ज किया गया है, जिसमें से कैंसरकारी 'हेक्सावेलेंट क्रोमियम' का स्तर 50.3 mg/L पाया गया। यह मात्रा 'भारतीय मानक ब्यूरो' (BIS) द्वारा पेय जल के लिए निर्धारित 0.05 mg/L की सुरक्षित सीमा से 1,000 गुना से भी अधिक है।
इस केमिकल का स्रोत अंबाद महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MIDC) जोन में स्थित इलेक्ट्रोप्लेटिंग, मेटल फिनिशिंग, पेंट और अन्य उद्योग हो सकते हैं।
मजबूरी में कर रहें दूषित पानी का इस्तेमाल
SANDRP ने दावा किया है कि नासिक नगर निगम द्वारा पानी की कम और अनियमित आपूर्ति के कारण अंबाड़ के निवासियों को दूषित पानी का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। संगठन के अनुसार, इसके दुष्परिणामस्वरूप बच्चों और महिलाओं सहित कई लोग केमिकल अल्सर, रैशेज और छालों जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की चपेट में आ गए हैं।
दर्द व सूजन जैसी बीमारियों के लक्षण
जारी बयान के अनुसार, 'युवा महिलाओं और बच्चों में लिम्फ नोड्स (गिल्टियों) में दर्द व सूजन और पुरानी बीमारियों के लक्षण देखे गए हैं। प्रभावित क्षेत्र की दो महिलाओं ने अचानक गर्भपात होने की जानकारी दी है। आशंका है कि ऐसे मामलों की संख्या इससे भी अधिक हो सकती है, इसलिए इसकी विस्तृत जांच होनी चाहिए।'
इसमें इस बात पर भी जोर दिया गया कि कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद रेगुलेटरी संस्थाओं की प्रतिक्रिया नाकाफी रही है।
MPCB ने सिर्फ एक कंपनी को जारी किया नोटिस
SANDRP ने आगे कहा, "पीले पानी की मीडिया रिपोर्ट सामने आने के बाद, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) ने 30 सितंबर, 2026 को सिर्फ एक कंपनी को सामान्य 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया।"
SANDRP ने कहा कि MPCB ने न तो पानी की जांच के आंकड़े सार्वजनिक किए और न ही प्रभावित निवासियों को इसकी जानकारी दी, जिससे समुदाय को जानलेवा केमिकल के खतरे के बारे में अंधेरे में रखा गया। (समाचार एजेंसी PTI के इनपुट के साथ)
