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मुंबई: पुनर्जन्म की आस में परिवार ने 4 साल तक फ्रीजर में रखी बुजुर्ग की लाश, US भेजने की थी तैयारी

Published: Wed, 30 Sep 2026 09:02 AM (IST)Updated: Wed, 30 Sep 2026 09:45 AM (IST)

मुंबई के मलाड में एक परिवार ने अपने 80 वर्षीय बुजुर्ग का शव चार साल तक फ्रीजर में रखा, इस उम्मीद में कि वे फिर से जीवित हो उठेंगे।

चार साल तक फ्रीजर में रखा बुजुर्ग का शव (एआई से बनाई गई सांकेतिक तस्वीर)

चार साल तक फ्रीजर में रखा बुजुर्ग का शव (एआई से बनाई गई सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. मुंबई के मलाड में बुजुर्ग का शव चार साल तक फ्रीजर में रखा।

  2. परिवार ने 'क्रायोनिक्स' तकनीक से शव को जीवित करने की उम्मीद रखी।

  3. पुलिस मामले की जांच कर रही, कानूनी सलाह ली जा रही है।

डिजिटल डेस्क, मुंबई। सोचिए कैसा हो कि जब किसी व्यक्ति की मौत हो जाए, तब उसके परिवार वाले उसका अंतिम संस्कार करने के बजाय व्यक्ति के फिर से जिंदा होने की आस देखने लगे, क्या ऐसा संभव है? नहीं ना...लेकिन ऐसा ही कुछ मुंबई के मलाड इलाके में हुआ है, जिसने सभी को हैरान कर दिया।

पूरे मामले को ऐसे समझिए कि मुंबई के मलाड इलाके में एक परिवार ने अपने 80 वर्षीय बुजुर्ग की मौत के बाद उनके शव को पिछले चार सालों से एक क्लिनिक के फ्रीजर में सुरक्षित रखा हुआ था। पुलिस को जब इस बात की भनक लगी, तो वे भी हैरान रह गए।

फिलहाल, पुलिस इस मामले में कानूनी पहलुओं को समझने के लिए एक्सपर्ट्स की सलाह ले रही है। पुलिस इस बात की सलाह ले रही है कि क्या कानूनी रूप से यह सही है? किसी भी शव को कितने दिनों तक ऐसे रखा जा सकता है?

2022 में हो गई थी बुजुर्ग की मौत...

बता दें कि कुनार पुलिस को सोमवार रात को एक गुप्त सूचना मिली थी, जिसके आधार पर पुलिस ने मलाड स्थित एक पॉलीक्लिनिक पर छापा मारा। पुलिस ने जब क्लिनिक की तलाशी ली, तो अंदर एक फ्रीजर में बुजुर्ग व्यक्ति का शव मिला। गौर करने वाली बात यह है कि यह क्लिनिक पिछले एक महीने से रेनोवेशन के चलते बंद पड़ा था।

पुलिस ने तुरंत मृत व्यक्ति के परिवार यानी उनकी बुजुर्ग पत्नी और उनके बेटा-बेटी से संपर्क किया। परिवार ने पुलिस को वे दस्तावेज दिखाए जिनसे साबित होता है कि बुजुर्ग व्यक्ति की 2022 में नैचुरल डेथ हुई थी।

चार साल तक क्यों रखा था शव?

अब जब मामला सामने आया, तब लोगों के मन में एक साथ कई सारे सवाल खड़े होने शुरू हुए। ऐसे में जब पुलिस ने बुजुर्ग व्यक्ति के बच्चों से पूछताछ शुरू की, तब बच्चों ने बताया कि वे पिता की मौत से इतने ज्यादा दुखी और विचलित थे कि वे उनके शव को लंबे समय तक सुरक्षित रखना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने ऑनलाइन रिसर्च की और अमेरिका के कुछ ऐसे संगठनों के बारे में पता लगाया जो 'क्रायोनिक्स' की सुविधा देते हैं।

अब समझिए क्या होता है क्रायोनिक्स?

क्रायोनिक्स एक ऐसी तकनीक है जिसमें कानूनी रूप से मृत व्यक्तियों के शवों को अत्यधिक कम तापमान पर लंबे समय तक संरक्षित रखा जाता है। हालांकि कोशिकाओं और भ्रूणों का क्रायोप्रेस्टेशन वैज्ञानिक रूप से स्थापित है, लेकिन इंसानी शवों पर क्रायोनिक्स को अभी भी मुख्यधारा के वैज्ञानिकों की तरफ से प्रायोगिक ही माना जाता है।

ऐसे में परिवार इस प्रक्रिया के तहत शव को अमेरिका शिफ्ट करने के लिए वहां के एक संगठन से लगातार बातचीत कर रहा था। इसके अलावा उन्होंने भारत में वकीलों से भी बात की थी कि क्या यहां शव को इस तरह संरक्षित रखना कानूनी रूप से वैध है या नहीं।

मकान मालिक को भी नहीं थी भनक

गौरतलब है कि इस पूरी प्रक्रिया के बीच शव पिछले चार साल से उसी क्लिनिक के फ्रीजर में रखा रहा। लेकिन न तो क्लिनिक के मैनेजमेंट ने और न ही परिवार ने इस बारे में स्थानीय पुलिस या मकान मालिक को कोई जानकारी दी थी। पुलिस को इस बात का पता सोमवार रात को स्थानीय लोगों के जरिए चला।

मकान मालिक, जिसने 2022 से क्लिनिक चलाने के लिए जगह किराए पर दी थी, उसने भी पुलिस को बताया कि उसे इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी। वह और उसका परिवार जब भी बीमार पड़ते थे, इसी क्लिनिक में डॉक्टर को दिखाने आते थे।

हरकत में पुलिस, अब क्या कर रही है?

मामला के सामने आने के बाद मंगलवार को पुलिस ने परिवार के सदस्यों, क्लिनिक प्रबंधन और मकान मालिक के बयान दर्ज कर लिए हैं। बुजुर्ग व्यक्ति का अंतिम संस्कार कब और कैसे किया जाएगा, इस पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस बल को क्लिनिक पर तैनात कर दिया गया है।