मुकेश अंबानी ने महिलाओं से कर दी ये बड़ी अपील, उद्योग जगत में मची हलचल
मुकेश अंबानी ने उद्योग जगत से कामकाजी महिलाओं, विशेषकर माताओं के लिए सहयोगी पारिस्थितिकी तंत्र बनाने का आग्रह किया। उन्होंने ...और पढ़ें

मुकेश अंबानी की महिलाओं को लेकर खास अपील (फोटो- रॉयटर्स)
HighLights
मुकेश अंबानी ने कामकाजी महिलाओं के लिए सहयोगी माहौल बनाने की अपील की
भारत अब महिला-नेतृत्व वाले विकास की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा रहा है
अरुंधति भट्टाचार्य की आत्मकथा 'अपराजिता' के लोकार्पण पर कही बात
राज्य ब्यूरो, मुंबई। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने देश के उद्योग जगत से कामकाजी महिलाओं और विशेषकर कामकाजी माताओं के लिए सहयोगी और मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि भारत अब महिलाओं के विकास से आगे बढ़कर महिला नेतृत्व वाले विकास की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा रहा है। महिलाएं विकास की केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि उसकी निर्माता बन रही हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसा भारत बनाना होगा, जहां हर लड़की बिना किसी सीमा के सपने देख सके और हर महिला बिना किसी बाधा के नेतृत्व कर सके।
अंबानी ने यह बात भारतीय स्टेट बैंक की पूर्व चेयरमैन अरुंधति भट्टाचार्य की आत्मकथा 'अपराजिता' के लोकार्पण के अवसर पर कही। उन्होंने भट्टाचार्य के जीवन को देश की महिलाओं के लिए प्रेरणा बताते हुए कहा कि उनकी उपलब्धियां केवल 'पहली' बनने तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने अपने पीछे आने वाली हजारों महिलाओं के लिए रास्ते खोले हैं।
उन्होंने कहा कि भट्टाचार्य ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद जिस तरह अपने कैरियर में मुकाम हासिल किया, वह दुनिया भर की कामकाजी माताओं के लिए प्रेरणादायक है। साथ ही, उनका जीवन यह भी याद दिलाता है कि कॉर्पोरेट जगत में महिलाओं को समान अवसर और अधिकार दिलाने के लिए अभी काफी कुछ किया जाना बाकी है।
मुकेश अंबानी ने अपने संबोधन में कहा कि जब भारत की महिलाएं आगे बढ़ती हैं तो भारत आगे बढ़ता है और जब महिलाएं अजेय होती हैं तो भारत भी अजेय बनता है। उन्होंने उद्योग जगत के नेताओं से आग्रह किया कि वे मिलकर कामकाजी महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों को कम करने और उनके नेतृत्व को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी पहल शुरू करें।
उन्होंने अरुंधति भट्टाचार्य और उनके जैसी अनुभवी महिला नेतृत्वकर्ताओं से इस अभियान का नेतृत्व करने का अनुरोध करते हुए कहा, "आप लीडरशिप लीजिये, हम आपको फॉलो करेंगे।"
अंबानी ने बताया कि रिलायंस फाउंडेशन भी इस पहल में अन्य संगठनों के साथ पूरी तरह शामिल होगा।
उन्होंने कहा कि आधुनिक भारत के नए मंदिरों यानी संस्थानों और उद्यमों के निर्माण व संचालन के लिए बड़ी संख्या में सशक्त महिला नेतृत्वकर्ताओं को तैयार और समर्थ बनाया जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं, खासकर युवतियों से कठिन परिस्थितियों में हार न मानने का आह्वान करते हुए चार संकल्प लेने की बात कही।
साथ खड़े लोगों का सम्मान करना, दोषारोपण के बजाय जिम्मेदारी लेना, जीवनभर सीखते रहना और अपने बाद आने वालों के लिए रास्ते खोलना। उन्होंने कहा कि यदि लाखों भारतीय इन संकल्पों को अपनाएं तो कोई चुनौती बहुत बड़ी नहीं होगी और कोई सपना भारत की पहुंच से दूर नहीं रहेगा।
महिलाओं से असाधारण साहस और क्षमता की अपेक्षा क्यों की जाती?
इस अवसर पर आगन्तुकों का आभार जताते हुए अरुंधती भट्टाचार्य ने कहा कि महिलाओं को हर परिस्थिति संभाल लेने पर अक्सर 'सुपरवुमन' कहकर सराहा जाता है, लेकिन सवाल यह होना चाहिए कि सामान्य जीवन में महिलाओं से असाधारण साहस और क्षमता की अपेक्षा क्यों की जाती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को हर मोर्चे पर खुद को 'सुपरवुमन' साबित करने की जरूरत नहीं, बल्कि व्यवस्था को अधिक न्यायपूर्ण और समान अवसर देने वाली बनाने की जरूरत है।
उन्होंने मुकेश अंबानी की उस पहल के लिए आभार जताया, जिसमें कामकाजी महिलाओं के लिए सहयोगी पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने की बात कही गई है। भट्टाचार्य ने कहा कि वास्तविक महिला सशक्तीकरण केवल महिलाओं से अतिरिक्त प्रयास की अपेक्षा करने से नहीं, बल्कि बेहतर नीतियों और व्यावहारिक सहयोग से संभव होगा। उन्होंने कहा कि वह एक छोटे शहर से आने वाली पहली पीढ़ी की विश्वविद्यालय छात्रा थीं और उनके मन में भी यह सवाल था कि वह अपने काम में वास्तव में कितना योगदान दे पाएंगी। उनके मुताबिक, किसी भी महिला को आगे बढ़ने के लिए 'परफेक्ट प्लान' की जरूरत नहीं है, बल्कि असफलता या कठिनाई के बाद एक बार फिर प्रयास करने की इच्छाशक्ति ही सबसे महत्वपूर्ण है।
