'पुणे पुलिस 15 अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करें', नाबालिगों से मारपीट मामले में मानवाधिकार आयोग सख्त
महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग ने पुणे के 15 से अधिक पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है।

पुणे पुलिस के 15 अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश (प्रतीकात्मक फोटो)
HighLights
मानवाधिकार आयोग ने 15 पुणे पुलिसकर्मियों पर FIR का आदेश दिया।
नाबालिगों को अवैध हिरासत में रखा और सार्वजनिक रूप से पीटा गया।
SC/ST अधिनियम के तहत कार्रवाई की भी सिफारिश की गई।
डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग (MSHRC) ने कमिश्नर से लेकर एक कांस्टेबल तक पुणे के 15 से अधिक पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश डीजीपी को दिया है।
यह आदेश हत्या के एक मामले में आठ नाबालिगों को पांच दिनों तक अवैध रूप से हिरासत में रखने और उनके साथ सार्वजनिक रूप से मारपीट करने के आरोप में दिया गया है।
15 पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज
एमएसएचआरसी ने 15 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के साथ ही अधिकारियों के खिलाफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रविधानों को लागू करने की भी सिफारिश की है, क्योंकि चार नाबालिग SC/ST समुदायों से थे।
नाबालिगों में से कुछ ने एक हत्या के मामले में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। उन्हें पांच दिनों तक पुलिस स्टेशन में अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। इसके साथ ही पुलिस गाड़ी के बोनट से बांधकर सार्वजनिक रूप से परेड करने के बाद उन पर हमला किया गया।
परिवार ने पुलिस कार्रवाई को दी चुनौती
पुलिस के इस तरह के एक्शन पर परिवार के सदस्यों में से एक ने चुनौती दी। इसके बाद नाबालिगों को किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश किया गया।
एमएसएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) ए एम बदर और सदस्य न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) स्वप्ना जोशी और आईपीएस (सेवानिवृत्त) संजय कुमार ने पुलिस कार्रवाई पर आपत्ति जताई।
एमएसएचआरसी ने कहा, 'सड़क पर कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चों की सार्वजनिक परेड मनोवैज्ञानिक युद्ध के एक सुविचारित अभियान के अलावा और कुछ नहीं है और नाबालिगों से उनकी अंतर्निहित गरिमा छीन ली गई है, उन्हें स्थायी रूप से अपराधी करार दिया गया है।'
