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तबीयत बिगड़ने से मनोज जरांगे की मुंबई यात्रा रुकी, मराठा आरक्षण आंदोलन पर असर

Published: Thu, 17 Sep 2026 12:12 AM (IST)

मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे की मुंबई कूच भूख हड़ताल और लंबे सफर के कारण बीड जिले में उनकी तबीयत बिगड़ने से रुक गई।

तबीयत बिगड़ने के कारण बीच में ही रुकी मनोज जरांगे की मुंबई यात्रा।

तबीयत बिगड़ने के कारण बीच में ही रुकी मनोज जरांगे की मुंबई यात्रा।

HighLights

  1. मनोज जरांगे की मुंबई कूच तबीयत बिगड़ने से बीच में रुकी।

  2. भूख हड़ताल और लंबे सफर ने स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाला।

  3. सरकार ने मराठा आरक्षण मुद्दे पर बातचीत का प्रस्ताव रखा।

राज्य ब्यूरो, मुंबई। मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे का मुंबई कूच अचानक तबीयत बिगड़ने के कारण बीड जिले तक पहुंचकर थम गया। लगातार जारी भूख हड़ताल और करीब 14 घंटे के लंबे सफर के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई।

डॉक्टरों के मुताबिक, उनका रक्तचाप और ब्लड शुगर काफी कम हो गया तथा शरीर में पानी की कमी हो गई थी। चिकित्सकों ने उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी है। फिलहाल उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।

जरांगे मंगलवार को जालना जिला स्थित अपने गांव अंतरवाली सराटी से मुंबई के लिए निकले थे। उनका लक्ष्य 19 सितंबर को मुंबई पहुंचकर आजाद मैदान में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन शुरू करना था।

मुंबई पुलिस पहले ही आजाद मैदान में प्रदर्शन की अनुमति देने से इंकार कर चुकी है। पुलिस ने गणेशोत्सव के दौरान कानून-व्यवस्था और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए अनुमति नहीं दी है।

बुधवार को बीड स्थित पटोदा पहुंचने के बाद जरांगे ने कहा कि लंबे सफर का उनकी सेहत पर गंभीर असर पड़ रहा है। उन्होंने पेट और पैरों में तेज जलन की शिकायत की। उन्होंने संकेत दिया कि यदि स्वास्थ्य ने साथ नहीं दिया तो मुंबई यात्रा रद भी करनी पड़ सकती है। साथ ही उन्होंने समर्थकों से अपील की कि वे उनके साथ मुंबई न आएं और उन्हें अकेले जाने दें।

इस बीच, महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने जरांगे से आंदोलन स्थगित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार बल प्रयोग के पक्ष में नहीं है और मराठा आरक्षण के मुद्दे पर बातचीत के लिए तैयार है। उनका कहना है कि संवाद और चर्चा के जरिए समाधान निकाला जा सकता है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पहले ही कह चुके हैं कि सरकार ने मराठा समुदाय की अधिकांश कानूनी रूप से वैध मांगों को स्वीकार किया है। उनके अनुसार कुछ मांगें संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया से जुड़ी हैं, जिन्हें नियमों और न्यायालय के निर्देशों के दायरे में ही पूरा किया जा सकता है।

उन्होंने गणेशोत्सव के दौरान मुंबई में आंदोलन से श्रद्धालुओं को होने वाली संभावित परेशानी पर भी चिंता जताई थी। जरांगे का पिछला मुंबई आंदोलन अगस्त-सितंबर 2025 में आजाद मैदान में हुआ था, जिसमें बड़ी संख्या में उनके समर्थक मुंबई पहुंचे थे। सरकार द्वारा उनकी कई मांगों पर कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद दो सितंबर को आंदोलन समाप्त हुआ था।