12 हजार फूड आउटलेट्स की जांच में 5800 ने तोड़े नियम, महाराष्ट्र FDA प्रमुख बोले- यह पब्लिक हेल्थ से जुड़ा मामला है
महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के 100 दिवसीय अभियान में 12,000 में से लगभग आधे खाद्य प्रतिष्ठान नियमों का ...और पढ़ें

तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में FDA की कार्रवाई (फाइल फोटो)
HighLights
महाराष्ट्र FDA ने 12,000 खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया
लगभग 5,800 आउटलेट्स नियमों का उल्लंघन करते पाए गए
आयुक्त ने इसे जन स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला बताया
डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) द्वारा चलाए गए 100 दिवसीय विशेष अभियान में राज्य भर के 12,000 खाद्य प्रतिष्ठानों में से लगभग आधे नियमों का उल्लंघन करते पाए गए हैं। इस दौरान 5,200 से अधिक आउटलेट्स को सुधार नोटिस जारी किए गए हैं और 603 लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं।
यदि सुधार नोटिस पाने वाले आउटलेट्स और निलंबित लाइसेंस वाले प्रतिष्ठानों दोनों को मिला दिया जाए, तो यह संख्या लगभग 5,800 तक पहुंच जाती है। यह कुल निरीक्षण किए गए प्रतिष्ठानों के लगभग आधे (50%) के बराबर है।
किस आधार पर किया गया निलंबन?
महाराष्ट्र FDA आयुक्त तुकाराम मुंधे के अनुसार, यह निलंबन 'खाद्य सुरक्षा और मानक (खाद्य व्यवसायों का लाइसेंस और पंजीकरण) विनियम, 2011' की अनुसूची 4 में निर्धारित नियमों का पालन न करने के कारण किए गए थे। उन्होंने इन नियमों और शर्तों को "गैर-परक्राम्य" (जिनसे कोई समझौता नहीं किया जा सकता) करार दिया।
यह मुद्दा सिर्फ सफाई तक ही सीमित नहीं...
महाराष्ट्र FDA आयुक्त तुकाराम मुंधे एनडीटीवी से बातचीत के दौरान बताया कि यह मुद्दा सिर्फ खाने में मिलावट की जांच करने या रेस्तरां की रसोई की सफाई की जांच करने तक सीमित नहीं है। बल्कि, इस पूरे मामले को जन स्वास्थ्य के नजरिए से देखने की जरूरत है।
खामियों को ठीक करने की आवश्यकता
तुकाराम मुंधे के अनुसार, पिछले तीन महीनों में, यानी लगभग 100 दिनों में, खाद्य क्षेत्र के लगभग 12,000 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया है। इस अभियान में उद्योग के विभिन्न हिस्से शामिल थे, जिनमें दूध और दूध उत्पाद, होटल और रेस्तरां शामिल हैं। इस दौरान एफडीए को ऐसी कमियां या खामियां मिलीं जिन्हें ठीक करने की आवश्यकता थी।
मुंधे ने बताया कि निरीक्षण किए गए प्रतिष्ठानों में से आधे से अधिक व्यवसाय नियमों का पूरी तरह पालन कर रहे थे। उन्होंने स्वीकार करते हुए कहा, "हां, समस्या निश्चित रूप से है," लेकिन साथ ही इस बात पर जोर दिया कि इसकी गंभीरता अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग है।
उन्होंने आगे स्पष्ट किया मुझे लगता है कि हमें इसे सिर्फ एक खाद्य सुरक्षा के मुद्दे के रूप में नहीं, बल्कि व्यापक जन स्वास्थ्य (पब्लिक हेल्थ) के मुद्दे के रूप में देखने की जरूरत है।
