मुंबई, राज्य ब्यूरो। Maratha Reservation: सर्वोच्च न्यायालय से तगड़ा झटका लगने के बावजूद महाराष्ट्र मराठा आरक्षण के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखेगा। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बुधवार को इस मामले में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप करने की मांग की है। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में राज्य सरकार द्वारा एक मत से पारित मराठा आरक्षण को निरस्त कर दिया है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे कहते हैं कि जिस प्रकार सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा है कि कोटा प्रदान करना राज्य का अधिकार नहीं है, बल्कि यह अधिकार केंद्र सरकार व राष्ट्रपति का है, तो मैं प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति से गंभीरतापूर्वक निवेदन करता हूं कि वे मराठा आरक्षण पर जल्द ही निर्णय करें।

उद्धव के अनुसार अतीत में केंद्र सरकार ने शाहबानो मामले में, एट्रोसिटी एक्ट के बारे में तथा अनुच्छेद 370 को रद करने के लिए जिस तरह संविधान संशोधन का सहारा लिया। केंद्र को अब वैसा ही त्वरित निर्णय मराठा आरक्षण का कोटा बढ़ाने में भी करना चाहिए। महाविकास अघाड़ी सरकार ने इस संबंध में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से भी संपर्क करने का फैसला किया है। यह फैसला आने के बाद जहां उद्धव ठाकरे मराठा समुदाय को सांत्वना देते व महाविकास अघाड़ी के तीनों दलों के नेता तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते नजर आए, वहीं नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फड़नवीस ने इस असफलता का ठीकरा महाविकास अघाड़ी सरकार पर ही फोड़ते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय को कानून निरस्त करने का अवसर महाविकास अघाड़ी सरकार में तालमेल की कमी के कारण मिला। देवेंद्र फड़नवीस के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल में ही महाराष्ट्र ने मराठा समुदाय को आरक्षण देने का फैसला किया था।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि यह फड़नवीस की ही सरकार थी, जिसने पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कर इसकी रिपोर्ट हासिल की और उसके आधार पर महाराष्ट्र विधानमंडल में मराठों को आरक्षण देने का कानून पास किया। फिर वह मुंबई उच्च न्यायालय को भी इस कानून से सहमत कराने में सफल रही, लेकिन महाविकास अघाड़ी सरकार सर्वोच्च न्यायालय में इस कानून के पक्ष में सही पैरवी नहीं कर सकी। हालांकि महाराष्ट्र के सभी राजनीतिक दलों ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है।

राज्य के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का फैसला उम्मीद के विपरीत व निराश करने वाला है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक चह्वाण ने भाजपा नेताओं के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि महाविकास अघाड़ी सरकार भी सर्वोच्च न्यायालय में वकीलों की उसी टीम के साथ आगे बढ़ी, जिसे फड़नवीस सरकार ने नियुक्त किया था। मराठा समुदाय के नेता, राजनीतिज्ञ व छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज छत्रपति उदयन राजे भोसले व संभाजी राजे भोसले भी मराठों के लिए आरक्षण की मांग करते रहे हैं। मुख्यमंत्री ठाकरे ने यह सवाल भी उठाया कि छत्रपति संभाजी प्रधानमंत्री के साथ एक बैठक की मांग करते रहे हैं। उन्हें प्रधानमंत्री की ओर से समय क्यों नहीं दिया जा रहा है ? सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद छत्रपति संभाजी ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि राज्य और केंद्र सरकारों को मिलकर वह रास्ता निकालना चाहिए, जिससे मराठों को बिना किसी विरोध के आरक्षण दिया जा सके। उनके अनुसार, हम अपनी मांग पर किसी समझौते के लिए तैयार नहीं हैं।