महाराष्ट्र में SIR के दौरान घटे 2.07 करोड़ मतदाता, निर्वाचन आयोग बोला-यह अंतिम फैसला नहीं
महाराष्ट्र में विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान ड्राफ्ट मतदाता सूची से 2.07 करोड़ नाम कम हुए हैं, जिस पर राजनीतिक विवाद छिड़ गया है।

महाराष्ट्र में एसआईआर में कटे 2.07 करोड़ मतदाता
HighLights
महाराष्ट्र ड्राफ्ट मतदाता सूची से 2.07 करोड़ नाम कम हुए।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कमी को अस्थायी बताया, स्थायी नहीं।
दावे-आपत्तियों के बाद अंतिम सूची प्रकाशित होगी, मौका मिलेगा।
राज्य ब्यूरो, मुंबई। महाराष्ट्र में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान ड्राफ्ट मतदाता सूची से 2.07 करोड़ से अधिक नाम कम होना राजनीतिक विवाद का कारण बन रहा है।
विपक्षी दल इसे लेकर सवाल उठा रहे हैं और बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप लगा रहे हैं। इस बीच महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि ड्राफ्ट सूची से बाहर हुए मतदाताओं के नाम स्थायी रूप से नहीं हटाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि यह केवल प्रारंभिक सूची है और अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने से पहले नागरिकों को दावे एवं आपत्तियां दर्ज कराने का पूरा अवसर मिलेगा।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, महाराष्ट्र में एसआईआर से पहले मतदाताओं की कुल संख्या करीब 9.79 करोड़ थी। घर-घर जाकर किए गए सर्वेक्षण के दौरान करीब 2.07 करोड़ मतदाताओं के गणना प्रपत्र प्राप्त नहीं हो सके। यही कारण है कि ड्राफ्ट सूची में मतदाताओं की संख्या में बड़ी कमी दिखाई दे रही है।
निर्वाचन विभाग का कहना है कि प्रपत्र नहीं मिलने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित मतदाता को मतदाता सूची से अंतिम रूप से बाहर कर दिया गया है।
निर्वाचन विभाग ने बताया कि जिन मतदाताओं के गणना प्रपत्र सर्वेक्षण के दौरान नहीं मिले, उन्हें सीधे मतदाता सूची से हटाने के बजाय एएसडी (एबसेंट, शिफ्टेड, डेड) श्रेणी में चिह्नित किया गया है। यानी संबंधित मतदाता अनुपस्थित हो सकता है, किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित हो चुका हो सकता है या उसकी मृत्यु हो चुकी हो सकती है।
अंतिम सूची तैयार करने से पहले इन मामलों का सत्यापन और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। चोकलिंगम ने जोर देकर कहा कि मतदाता सूची के प्रारूप में किसी नाम का नहीं दिखना अपने आप में मताधिकार समाप्त होने का प्रमाण नहीं है।
पात्र नागरिक निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा प्रस्तुत कर सकते हैं। निर्वाचन विभाग का उद्देश्य पुनरीक्षण के माध्यम से मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना है।
एसआईआर के दौरान फॉर्म नहीं मिलने वालों की संख्या का बड़ा हिस्सा महाराष्ट्र के प्रमुख शहरी जिलों से सामने आया है। आंकड़ों के अनुसार, कुल अप्राप्त प्रपत्रों में करीब 45.4 प्रतिशत हिस्सेदारी मुंबई, मुंबई उपनगर, ठाणे और पुणे जैसे जिलों की है।
महानगरों में बड़ी संख्या में लोगों का रोजगार या अन्य कारणों से बार-बार स्थान बदलना, किराए के मकानों में रहना और सर्वेक्षण के समय घर पर मौजूद नहीं होना इसके प्रमुख कारणों में माना जा रहा है। 2.07 करोड़ नामों के ड्राफ्ट सूची में नहीं होने को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
विपक्ष का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर नामों का कम होना गंभीर चिंता का विषय है और इससे वास्तविक मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। वहीं निर्वाचन विभाग लगातार यह स्पष्ट कर रहा है कि एसआईआर की ड्राफ्ट सूची अंतिम सूची नहीं है।
अब निगाहें दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया पर टिकी हैं। निर्वाचन विभाग के अनुसार, जिन पात्र मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं, वे निर्धारित अवधि में आवश्यक दस्तावेजों के साथ दावा दाखिल कर सकते हैं। इन दावों के निस्तारण के बाद ही अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
