हाफ्किन बायो-फार्मा का निजीकरण नहीं होगा, महाराष्ट्र विधानसभा में मंत्री ने दी जानकारी
महाराष्ट्र सरकार ने हाफ्किन बायो-फार्मास्यूटिकल कार्पोरेशन लिमिटेड के निजीकरण के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।

हाफ्किन बायो-फार्मा के निजीकरण का कोई प्रस्ताव नहीं
HighLights
हाफ्किन बायो-फार्मा के निजीकरण का कोई प्रस्ताव नहीं
पूर्व आधुनिकीकरण प्रस्ताव में केवल एक कंपनी ने रुचि दिखाई
संस्थान को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री के साथ बैठक होगी
डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने कहा कि उसके पूर्ण स्वामित्व वाली हाफ्किन बायो-फार्मास्यूटिकल कार्पोरेशन लिमिटेड के निजीकरण का कोई प्रस्ताव नहीं है और एक पूर्व प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाया गया है क्योंकि वैक्सीन निर्माण में सौ वर्षों के अनुभव वाले इस प्रमुख सार्वजनिक उपक्रम के लिए केवल एक कंपनी ने रुचि दिखाई थी।
विधानसभा में खाद्य और औषधि प्रशासन (एफडीए) मंत्री नारहरी जिरवाल ने कहा कि सरकार का उद्देश्य कभी भी वैक्सीन निर्माता को किसी निजी खिलाड़ी को सौंपना नहीं था। प्रस्ताव का उद्देश्य मुंबई स्थित हाफ्किन की सुविधाओं को वैक्सीन्स और जैविक उत्पादों के निर्माण के लिए साझेदारी माडल से आधुनिक बनाना था।
हाफ्किन बायो-फार्मा के निजीकरण का कोई प्रस्ताव नहीं
राज्य ने वैक्सीन, रक्त घटकों और अन्य जैविक उत्पादों के लिए सुविधाओं के आधुनिकीकरण के लिए केंद्र का समर्थन मांगा था। चूंकि केवल एक कंपनी ने रुचि व्यक्त की थी, इसलिए प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया गया। मुंबई के परेल स्थित यह कंपनी मुख्य रूप से जीवन रक्षक दवाओं, टीकों (वैक्सीन) और विषरोधी दवाओं के विकास और निर्माण के लिए विख्यात है।
विपक्ष के सदस्यों ने यह स्पष्टता मांगी कि क्या सरकार एक नया ईओआई जारी करेगी और आरोपित अनियमितताओं की समयबद्ध जांच की मांग की। सदस्यों ने यह भी मांग की कि ईमानदार अधिकारी माने जाने वाले एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंडे को कंपनी का प्रभार दिया जाए, जिस पर मंत्री ने सहमति जताई।
संस्थान को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री के साथ बैठक होगी
हाफ्किन के निजीकरण को खारिज करते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि उत्पादन ठप हो गया है और संगठन को मानव संसाधन और धन की कमी का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने मांग की कि महाराष्ट्र सरकार विधानसभा में स्पष्ट रूप से कहे कि हाफ्किन कार्पोरेशन का निजीकरण नहीं होगा।
उन्होंने सरकार से 150 करोड़ रुपये आवंटित करने का भी अनुरोध किया। जिरवाल ने स्पष्ट किया कि हाफ्किन बायो-फार्मा कार्पोरेशन लिमिटेड के निजीकरण का कोई प्रस्ताव नहीं है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में अधिकारियों और विधायकों की बैठक बुलाई जाएगी ताकि संस्थान को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की जा सके।
