सूखे की मार झेल रहे महाराष्ट्र के 34 जिले, CM फडणवीस ने किसानों और छात्रों के लिए की 12 बड़ी घोषणाएं
महाराष्ट्र सरकार ने मानसून की कमी के कारण 358 में से 265 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र ...और पढ़ें

महाराष्ट्र में मानसून की मार (यह तस्वीर AI द्वारा जनरेट की गई है।)
HighLights
महाराष्ट्र के 265 तालुके सूखाग्रस्त घोषित, 75% क्षेत्र प्रभावित।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने किसानों, छात्रों के लिए 12 राहतें दीं।
मानसून की कमी से खरीफ फसलों को भारी नुकसान हुआ।
राज्य ब्यूरो, मुंबई । महाराष्ट्र में मानसून की बेरुखी और बारिश में भारी कमी से पैदा हुए कृषि संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने राज्य के 358 में से 265 तालुकों (तहसीलों) को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है। इसके साथ ही प्रभावित किसानों, खेतिहर मजदूरों और विद्यार्थियों को राहत देने के लिए 12 उपायों की घोषणा की गई है।
सूखाग्रस्त घोषित तालुकों की संख्या राज्य के कुल तालुकों का करीब 75 प्रतिशत है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि फसलों को हुए नुकसान का आकलन पूरा होने के बाद किसानों को वित्तीय सहायता देने के संबंध में अलग से निर्णय लिया जाएगा।
राज्य में इस वर्ष मानसून के दौरान सामान्य से काफी कम बारिश हुई है। एक जून से 18 सितंबर तक महाराष्ट्र में 932.3 मिमी सामान्य वर्षा के मुकाबले 755.9 मिमी बारिश दर्ज की गई। यह औसत से 18.8 प्रतिशत कम है।
मराठवाड़ा के छत्रपति संभाजीनगर संभाग में स्थिति सबसे गंभीर रही, जहां सामान्य के मुकाबले 30.8 प्रतिशत कम बारिश हुई। विदर्भ, उत्तर महाराष्ट्र और पश्चिम महाराष्ट्र के कई हिस्सों में भी बारिश की कमी से खरीफ फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ा है।
सरकार के निर्णय के अनुसार, सूखे की मार राज्य के 34 जिलों के विभिन्न तालुकों तक पहुंची है। यवतमाल, जलगांव, अहिल्यानगर, अमरावती और नांदेड़ सहित कई जिलों में बड़ी संख्या में तालुके सूखाग्रस्त घोषित किए गए हैं।
मराठवाड़ा के धाराशिव और बीड जैसे जिलों में लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण फसलों, पशुओं और ग्रामीणों की पेयजल जरूरतों पर असर पड़ रहा है। सूखा प्रबंधन संहिता के तहत निर्धारित 'ट्रिगर-1' मानदंडों के आधार पर यह निर्णय लिया गया है। इसमें बारिश की कमी और लंबे समय तक वर्षा नहीं होने जैसे संकेतकों को ध्यान में रखा गया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सूखाग्रस्त क्षेत्रों में राहत कार्यों को तेजी से लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत किसानों को भूमि राजस्व में छूट, फसल ऋण का पुनर्गठन और कृषि संबंधी कर्ज की वसूली स्थगित करने जैसे उपाय किए जाएंगे। कृषि पंपों के बिजली बिल में रियायत दी जाएगी।
सूखाग्रस्त गांवों में किसानों के बिजली कनेक्शन नहीं काटे जाएंगे। प्रभावित क्षेत्रों के स्कूल और कालेज विद्यार्थियों को परीक्षा शुल्क में छूट मिलेगी। रोजगार गारंटी योजना के तहत अधिक काम उपलब्ध कराने के लिए नियमों में ढील दी जाएगी।
जरूरत के अनुसार पेयजल टैंकरों की व्यवस्था होगी। पशुओं के लिए चारा और जरूरतमंद परिवारों के लिए खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाएगा। जल संरक्षण के कार्य भी शुरू किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने फसल नुकसान का तत्काल आकलन करने के निर्देश दिए हैं। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा है कि नुकसान का पंचनामा होने के बाद सूखाग्रस्त तहसीलों की संख्या के आंकड़े बढ़ाए भी जा सकते हैं।
बता दें कि जिलाधिकारियों को जीपीएस लोकेशन और तस्वीरों के साथ पंचनामे पूरे करने होंगे। सोयाबीन, कपास, मक्का, बाजरा और अरहर जैसी खरीफ फसलों को बारिश की कमी तथा कीट-रोगों के कारण नुकसान पहुंचा है।
