नई दिल्‍ली, जेएनएन। महाराष्ट्र में जारी सियासी तपिश के बीच राज्‍य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। मुलाकात के बाद अपने सहयोगी दलों कांग्रेस-एनसीपी को झटका देते हुए उन्‍होंने दो टूक कहा कि नागरिकता संशोधन कानून से किसी को डरने की जरूरत नहीं है। उन्‍होंने कहा कि सीएए पर मुसलमानों को डराया जा रहा है। पीएम मोदी के हवाले से उद्धव ने यह भी कहा कि एनआरसी असम के अलावा पूरे देश में कहीं लागू नहीं होने जा रहा है। मुख्‍यमंत्री बनने के बाद पहली बार दिल्‍ली के दौरे पर आए उद्धव ठाकरे ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी और भाजपा के वरिष्‍ठ नेता लालकृष्‍ण आडवाणी से भी मुलाकात की। मुलाकातों के दौरान उनके बेटे आदित्‍य ठाकरे भी मौजूद रहे। 

एनपीआर की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे 

शिवसेना प्रमुख ने यह भी साफ कर दिया कि महाराष्ट्र में एनपीआर की प्रक्रिया को उनकी सरकार आगे बढ़ाएगी। उनका बयान इसलिए अहम है क्योंकि प्रधानमंत्री से मिलने के बाद उन्होंने कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी मुलाकात की। माना जा रहा है कि वहां भी कांग्रेस के रुख के उलट उन्होंने एनपीआर पर आगे बढ़ने की बात कही। देखने की बात होगी कि यह मतभेद किस ओर जाता है।

सीएए का समर्थन किया

मुख्यमंत्री बनने के बाद राजनीतिक संतुलन साधने के मकसद से पहली बार दिल्ली आए उद्धव ठाकरे का सबसे विवादित सियासी मुद्दे पर नजरिया शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस के गठबंधन में तनाव और बढ़ा सकता है। उद्धव के रुख के उलट एनसीपी-कांग्रेस सीएए-एनआरसी का विरोध करने के साथ एनपीआर में एनआरसी से जुड़े सवालों को शामिल किए जाने की आशंका पर भी सवाल उठा रहे हैं। मगर ठाकरे ने अपने सहयोगी दलों की इन चिंताओं से इतर सीएए का समर्थन किया है।

डरने की जरूरत नहीं 

मोदी से मुलाकात के बाद उद्धव ठाकरे ने पत्रकारों से कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी से सीएए-एनआरसी और एनपीआर को लेकर मेरी बातचीत हुई। इस बातचीत में बनी समझ के आधार पर मेरा मानना है कि सीएए को लेकर किसी को डरने की जरूरत नहीं है। यह कानून किसी को देश से निकालने का कानून नहीं है और न ही किसी को निकाला जाएगा। उद्धव ने कहा कि यह सही है कि पड़ोसी देशों में उत्पीड़न के शिकार जो नागरिक हैं वे हिन्दू हैं और सीएए उन्हीं को नागरिकता देने का कानून है।

पूरे देश में एनआरसी नहीं होने जा रहा

उद्धव ने बताया कि पीएम ने कहा कि पूरे देश में एनआरसी नहीं होने जा रहा है। केवल असम में एनआरसी है और इसकी वजह सबको मालूम है। एनपीआर लागू करने पर कांग्रेस-एनसीपी के एतराज से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हर दस साल में जनगणना होती है और एनपीआर इसका हिस्सा है। एनपीआर किसी को घर से बाहर निकालने के लिए नहीं है। हालांकि सहयोगी दलों की चिंता के मद्देनजर उद्धव ने यह जरूर कहा कि यदि एनपीआर में खतरनाक पहलू सामने आएंगे तो फिर विवाद हो सकता है और तब वे इसे देखेंगे।

कांग्रेस-एनसीपी से अलग रुख अपनाया 

सीएए-एनआरसी-एनपीआर पर उनका यह रुख कांग्रेस-एनसीपी से मेल नहीं खा रहा तो क्या गठबंधन में समस्या नहीं आएगी? इस सवाल पर उद्धव ने कहा कि वे अपनी समझ के हिसाब से बात कह रहे कि हमारे किसी भी नागरिक का अधिकार नहीं जाएगा। सीएए पर मुसलमानों को डरने की जरूरत नहीं है और एनआरसी नहीं होने जा रहा है। जब ऐसी बात नहीं है तो फिर सीएए विरोधी आंदोलन क्यों हो रहा है...?

गठबंधन में कोई दिक्कत नहीं 

शिवसेना नेता ने कहा कि जिन लोगों ने आंदोलन भड़काया है उन्हें यह समझने की जरूरत है। आंदोलन किन लोगों ने भड़काया है? इस सवाल को उद्धव ने यह कहते हुए टाल दिया कि वे दिल्ली में नहीं रहते। सहयोगी दलों से इस मसले पर खींचतान को नकारते हुए उद्धव ने कहा कि गठबंधन में कोई दिक्कत नहीं है। साझा न्यूनतम कार्यक्रम पर सरकार आगे बढ़ रही है और उनकी सरकार बिल्कुल पांच साल चलेगी। 

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