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महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने उठाई SIR में अधिकारियों को अधिक अधिकार देने की मांग, ईसीआईनेट पर भी उठाए सवाल

Published: Tue, 29 Sep 2026 10:25 PM (IST)

महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान स्थानीय निर्वाचन अधिकारियों को ...और पढ़ें

महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने उठाई SIR में अधिकारियों को अधिक अधिकार देने की मांग

महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने उठाई SIR में अधिकारियों को अधिक अधिकार देने की मांग

HighLights

  1. ईसीआईनेट सॉफ्टवेयर में बदलाव की मांग, अधिक लचीलेपन हेतु

  2. निर्वाचन अधिकारियों को व्यक्तिगत सुनवाई से छूट देने का अधिकार

  3. वंचित वर्गों के लिए अतिरिक्त दस्तावेज स्वीकार करने की सुविधा

राज्य ब्यूरो, मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के दौरान स्थानीय निर्वाचन अधिकारियों को अधिक लचीलापन देने के लिए चुनाव आयोग के ईसीआईनेट साफ्टवेयर में पांच बदलाव करने की मांग की है।

उनका कहना है कि निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को चुनाव कानून के तहत पहले से प्राप्त अधिकारों का इस्तेमाल करने की अधिक स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। इसके लिए उन्होंने 24 सितंबर को चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर साफ्टवेयर में आवश्यक सुधार करने का प्रस्ताव दिया है।

ईसीआईनेट सॉफ्टवेयर में बदलाव की मांग

चोकलिंगम की मांग ऐसे समय सामने आई है, जब एसआइआर को लेकर चुनाव आयोग के भीतर अधिकारों और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर चर्चा हो रही है। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी भी पहले यह चिंता जता चुके हैं कि ईसीआईनेट साफ्टवेयर की व्यवस्था के कारण ईआरओ अपने कानूनी अधिकारों का पूरी तरह इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं।

महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की प्रमुख मांगों में मतदाताओं को व्यक्तिगत सुनवाई से छूट देने का विकल्प भी शामिल है। उनका प्रस्ताव है कि यदि किसी मतदाता ने वैध और संतोषजनक दस्तावेज जमा कर दिए हैं, तो ईआरओ को उसे व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाने से छूट देने का अधिकार मिलना चाहिए।

वर्तमान व्यवस्था में साफ्टवेयर के माध्यम से निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होता है। ऐसे में दस्तावेजों की जांच के बाद भी मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाने की जरूरत पड़ सकती है। चोकलिंगम चाहते हैं कि ईआरओ को मामले की परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लेने की सुविधा मिले। इससे मतदाताओं को अनावश्यक परेशानी से बचाने के साथ ही निर्वाचन अधिकारियों का काम भी आसान हो सकता है।

चोकलिंगम ने एसआइआर के नोटिस में शामिल 13 दस्तावेजों के अतिरिक्त अन्य प्रमाणपत्र और दस्तावेज स्वीकार करने का विकल्प देने की भी मांग की है। उनका तर्क है कि समाज के कुछ वंचित वर्गों के पास निर्धारित सूची में शामिल दस्तावेज उपलब्ध नहीं हो सकते हैं।

किन समुदायों के दस्तावेज जुटाने समस्या?

विशेष रूप से आदिवासी, बेघर और यौनकर्मी समुदायों के लोगों को दस्तावेज जुटाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में केवल निर्धारित सूची के दस्तावेजों पर निर्भर रहने से इन वर्गों के मतदाताओं को परेशानी हो सकती है। अतिरिक्त दस्तावेज स्वीकार करने की सुविधा मिलने से उनके मामलों पर व्यावहारिक तरीके से विचार किया जा सकेगा।

बता दें कि ईसीआईनेट चुनाव आयोग का केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफार्म है, जिसका इस्तेमाल मतदाता सूची के प्रबंधन और चुनाव संबंधी विभिन्न कार्यों में किया जाता है। एसआइआर के दौरान भी निर्वाचन अधिकारी इसी व्यवस्था के माध्यम से मतदाताओं से जुड़े मामलों का निपटारा कर रहे हैं। इस बीच, चुनाव आयोग ने कुछ बदलाव किए हैं।

तार्किक विसंगतियों के आधार पर चिह्नित मतदाताओं को ऐसे मामलों में व्यक्तिगत सुनवाई के लिए उपस्थित होने से छूट देने का निर्णय लिया गया है। साथ ही, बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को मतदाताओं के घर जाकर दस्तावेज एकत्र करने और उन्हें ईसीआईनेट पर अपलोड करने की अनुमति दी गई है।