मुंबई, प्रेट्र। नोबेल पुरस्कार विजेता व प्रख्यात अर्थशास्त्री अमत्र्य सेन पर बनी डाक्यूमेंट्री विवाद में सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष पहलाज निहलानी ने कहा है कि जिसे आपत्ति है वह ऊपर अपील कर सकता है, सेंसर बोर्ड का फैसला बिलकुल ठीक है।

 

उधर, अभिनेता कबीर बेदी ने ट्वीट करके सेंसर बोर्ड को संकुचित मानसिकता वाले लोगों को समूह तक करार दिया है। उनका कहना है कि सारे विश्व में बोर्ड भारत की छवि को खराब कर रहा है, लेकिन पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष ने सेंसर बोर्ड के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि नोबेल पुरस्कार मिलने का मतलब यह नहीं है कि आप कुछ भी बोल सकते हैं। बोर्ड ने जो फैसला लिया वह बिलकुल ठीक है। हालांकि अमत्र्य सेन ने सारे विवाद पर केवल इतना ही कहा कि उन्होंने ये डाक्यूमेंट्री नहीं बनाई है। ये केवल उनके जीवन पर है। उनका कहना है कि जिसने इसे बनाया है उससे सवाल करें तो बेहतर रहेगा।

 

उल्लेखनीय है कि सेन के जीवन पर निर्देशक सुमन घोष ने डाक्यूमेंट्री बनाई है। सेंसर बोर्ड ने इसमें कई चीजों को हटाने का फरमान सुनाया है। इसमें गाय, हिंदू  भारत, गुजरात, भारत का हिंदुत्व पक्ष जैसे पक्षों को इससे हटाने के लिए कहा गया है। घोष ने बोर्ड के फैसले को मानने से इन्कार कर दिया है। अब उनके समक्ष केवल एक ही विकल्प बचता है कि वह (एफसीएटी) फिल्म सर्टिफिकेशन अपीलेट ट्रिब्यूनल में अपनी परेशानी को रखें। सेंसर बोर्ड के फैसले एफसीएटी ही दखल दे सकता है।

 

दिग्गज आए समर्थन में: इस मामले में अपने क्षेत्र के कई दिग्गज लोगों ने बोर्ड की निंदा की है। इतिहासकार रोमिला थापर, फिल्म निर्माता श्याम बेनेगल ने बोर्ड के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब भारत में बोलने व चर्चा करने पर पाबंदी नहीं है तो फिर डाक्यूमेंट्री के चार शब्दों को हटाने के लिए फरमान जारी क्यों किया गया।

 

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