पुणे IISER लाइब्रेरी से हटाई गई उमर खालिद की किताब, विवाद के बाद इंस्टीट्यूट ने लिया फैसला
भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर), पुणे ने जेल में बंद उमर खालिद की किताब 'फ्रैक्चर्ड कम्युनिटीज' को अपने पुस्तकालय से हटा दिया है।

आईआईएसईआर पुणे ने उमर खालिद की किताब हटाई

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राज्य ब्यूरो, मुंबई। भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर), पुणे ने जेल में बंद जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद की किताब को अपने पुस्तकालय से हटा दिया है।
किताब को पुस्तकालय में शामिल किए जाने पर इंटरनेट मीडिया पर आपत्ति जताई गई थी। संस्थान ने एक बयान में कहा है कि किसी भी तरह की गलतफहमी या अशांति से बचने के लिए एहतियातन यह कदम उठाया गया है।
किताब का नाम 'फ्रैक्चर्ड कम्युनिटीज : आदिवासी हिस्ट्रीज एंड द पॉलिटिक्स ऑफ पावर' है। यह खालिद के पीएचडी शोध पर आधारित है।
इसमें झारखंड के सिंहभूम क्षेत्र में पिछले दो सौ वर्षों के दौरान राज्य के गठन, औपनिवेशिक शासन और आदिवासी समुदायों तथा सत्ता के बीच संबंधों का अध्ययन किया गया है। शोध में विशेष रूप से ‘हो’ समुदाय पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अधीन स्वायत्त संस्थान
आईआईएसईआर द्वारा जारी एक बयान के अनुसार पुस्तकालय में किताबें संस्थान के सदस्यों की सिफारिशों और पुस्तकालय के कामकाज की निगरानी करने वाली समिति के माध्यम से शामिल की जाती हैं।
संस्थान के अनुसार, हर महीने विभिन्न विषयों की औसतन 50 से अधिक किताबें पुस्तकालय में जोड़ी जाती हैं। बयान में कहा गया कि संबंधित किताब का मामला अधिकारियों के संज्ञान में आते ही उसे वापस लेने का फैसला किया गया।
वास्तव में इंटरनेट मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में सवाल उठाया गया था कि केंद्र सरकार के विज्ञान अनुसंधान संस्थान में उमर खालिद के शोध को किताब के रूप में शामिल किया गया है।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व छात्र खालिद को सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था। उन पर फरवरी 2020 में दिल्ली में हुए दंगों की साजिश में शामिल होने का आरोप है।
इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। उन पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज है।
