राज्य ब्यूरो, मुंबई। फोरेंसिक जांच में इंद्राणी मुखर्जी द्वारा अधिक मात्रा में अवसाद की दवाएं लेने की पुष्टि हो गई है। जे.जे. अस्पताल ने यह पुष्टि फोरेंसिक लैब से मिली रिपोर्ट के बाद की है। अपनी बेटी शीना बोरा की हत्या के मामले में भायखला जेल में बंद इंद्राणी को शुक्रवार की रात अद्र्धचेतनावस्था में सरकारी जे.जे. अस्पताल में लाया गया था। अस्पताल में भर्ती किए जाने बाद उसकी गहन जांच की गई। इंद्राणी के खून और पेशाब की जांच मुंबई की कालीना फोरेंसिक लैब से करवाई गई। वहां से आई रिपोर्ट में कहा गया है कि इंद्राणी के पेशाब के नमूने में अवसाद रोधी दवा बेन्जोडाइजीपीन की अधिक मात्रा पाई गई है। 

जे.जे.अस्पताल के सूत्रों के अनुसार जेल में इंद्राणी मुखर्जी को अवसाद रोधी दवा एमीट्रिप्टीलाइन की खुराक दी जाती है। लेकिन यह बेन्जोडाइजीपीन से बिल्कुल भिन्न होती है। इंद्राणी को बेन्जोडाइजीपीन की खुराक इतनी अधिक मात्रा में कैसे प्राप्त हुई, पुलिस को इसकी जांच करनी चाहिए। 

बता दें कि इंद्राणी के ऐसी दवा की अधिक खुराक लेने का मामला दूसरी बार सामने आया है। अक्तूबर 2015 में भी उसे बेहोशी की अवस्था में जेल से जे.जे.अस्पताल लाया गया था। तब भी उसकी जांच मे बेंजोडाइजीपीन की अधिक मात्रा लेने की बात सामने आई थी। अवसादरोधी दवा लेने वाले किसी सामान्य मरीज के शरीर में बेंजोडाइजीपीन की मात्रा लगभग 200 के आसपास हो सकती है। लेकिन उस समय इंद्राणी के शरीर में यह दस गुने के से भी ज्यादा, यानी 2,088 पाई गई थी। तब राज्य कारागार विभाग की तरफ से इंद्राणी द्वारा दवाओं के ओवरडोज मामले की जांच के आदेश दिए गए थे। आईएनएक्स मीडिया की सहसंस्थापक इंद्राणी मुखर्जी पर अपनी बेटी शीना बोरा की 2012 में हत्या कर देने का आरोप है।   

Posted By: Babita

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