मुंबई, एएनआइ। Fire: महाराष्ट्र में पालघर जिले के बोईसर-तारापुर एमआइडीसी क्षेत्र में सिनय कंपनी के बाहर रखे एक रासायनिक टैंकर में भीषण आग लग गई और वहां रखे प्लास्टिक के पाइप फैल गए। मौके पर फायर ब्रिगेड की पांच गाड़ियां मौजूद हैं। अभी तक किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। वहीं, अभी तक आग लगने के कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है। आग पर काबू पाने की कोशिश की जा रही है। गौरतलब है कि इससे पहले भी महाराष्ट्र में अलग-अलग जगहों पर आग की विभिन्न घटनाओं में जानमाल का काफी नुकसान हो चुका है। ठाणे के मुंबरा में प्राइम क्रिटिकेयर अस्पताल में गत दिनों आग लगने से चार मरीजो की मौत हो गई थी। बोइसर पुलिस स्टेशन के अधिकारी ने बताया कि जिस भी व्यक्ति की इसमें गलती सामने आती है, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। घटना में अब तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

#WATCH | Maharashtra: A massive fire breaks out in a chemical tanker kept outside Sinay Company in Boisar-Tarapur MIDC area in Palghar district and spread to plastic pipes kept there. 5 fire tenders are present at the spot. No injuries reported yet. Details awaited. pic.twitter.com/34cKfo4MvX

दुर्भाग्य महाराष्ट्र का पीछा नहीं छोड़ रहा है। गत दिनों महाराष्ट्र के एक कोरोना अस्पताल में आइसीयू का एसी फटने से 13 मरीजों को जान से हाथ धोना पड़ा। नासिक के एक कोरोना अस्पताल में आक्सीजन की आपूर्ति बाधित होने से 24 मरीजों की जान जा चुकी है। मुंबई से सटे विरार के विजय वल्लभ अस्पताल में यह हादसा हुआ। आइसीयू की एसी यूनिट में धमाके के बाद आग लग गई। आग ने पलक झपकते ही पूरे आइसीयू को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे के समय आइसीयू में 17 मरीज भर्ती थे। दरवाजे के पास के बिस्तरों पर लेटे सिर्फ चार मरीजों को किसी तरह बाहर निकाला जा सका। बाकी 13 मरीजों की जलने से मौत हो गई। पुलिस उपायुक्त किशोर गवास का कहना है कि आग लगने के पांच मिनट के अंदर ही वसई-विरार महानगरपालिका के दमकल विभाग की गाड़ियों ने अस्पताल पहुंचकर आग बुझाना शुरू कर दिया था।

दूसरी मंजिल पर स्थित आइसीयू की आग पर 45 मिनट में ही काबू भी पा लिया गया। इसके बावजूद 13 लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी। एसी में धमाका होते ही अस्पताल में भगदड़ मच गई। अन्य वार्डों में भर्ती चलने-फिरने में सक्षम मरीज अस्पताल छोड़कर भागने लगे। हादसे में मारे गए मरीजों के परिजन अस्पताल के बाहर हंगामा करते देखे गए। घटनास्थल का दौरा करने गए राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री एकनाथ शिंदे के सामने भी लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। दूसरी तरफ, महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा कि अस्पताल में आग लगने की घटना कोई राष्ट्रीय खबर नहीं है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने एक बयान में कहा कि आग के कारणों की ठीक से जांच की जानी चाहिए। प्रशासन को इस बात की जांच के निर्देश दे दिए गए हैं कि अस्पताल में आगजनी से निपटने के उचित इंतजाम थे या नहीं। मीरा-भायंदर-वसई-विरार के पुलिस आयुक्त सदानंद दाते ने भी कहा है कि उन्होंने क्राइम ब्रांच को हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं। जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।

राज्य सरकार की नाकामियों पर उसे लगातार घेरते आ रहे नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फड़नवीस ने कहा कि यह एक और स्तब्ध करने वाली घटना है। अस्पताल में आगजनी की घटना से दुखी हूं। अस्पताल के एक कर्मचारी ने कहा है कि एसी काम नहीं कर रहा था और इसकी मरम्मत की जा रही थी। चार महीनों में चौथा बड़ा हादसा पिछले चार महीनों में महाराष्ट्र के अस्पतालों में होने वाली यह चौथी बड़ी दुर्घटना है। वर्ष की शुरुआत में ही 16 जनवरी को भंडारा के सरकारी अस्पताल में शार्ट सर्किट से लगी आग में 10 शिशुओं की मौत हो गई थी। 26 मार्च को मुंबई के भांडुप स्थित एक माल की चौथी मंजिल पर चल रहे कोरोना अस्पताल में आग लगने से 10 मरीज मारे गए थे। फिर नासिक में आक्सीजन लीक होने से 24 मरीजों की मौत हो गई।