मुंबई, राज्य ब्यूरो। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख से संबंधित जांच के मामले में अभियोजन पक्ष की शिकायत (आरोप पत्र के समकक्ष) पेश कर दी है। मनी लांड्रिंग के इस मामले में अभी तक देशमुख के दो सहयोगी ईडी की गिरफ्त में आ चुके हैं, लेकिन देशमुख स्वयं ईडी की पूछताछ से बचते आ रहे हैं। ईडी ने सीबीआइ द्वारा अनिल देशमुख के विरुद्ध भ्रष्टाचार के मामले में जांच शुरू करने के बाद देशमुख व उनके निजी सचिव रहे संजीव पलांडे व निजी सहायक कुंदन शिंदे के विरुद्ध पीएमएलए एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। इसी मामले में पलांडे व शिंदे को गिरफ्तार किया जा चुका है। सोमवार को इन दोनों के विरुद्ध ही इस मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत में आरोपपत्र पेश किया गया।

आरोपपत्र के साथ सबूत के तौर पर कई दस्तावेज भी पेश किए गए हैं। सुनवाई के दौरान कुंदन शिंदे के वकील एजाज खान ने अदालत से कहा कि शिंदे छह जुलाई से न्यायिक हिरासत में है। उससे एक बार भी ईडी ने पूछताछ नहीं की है। सोमवार को सीधे आरोपपत्र पेश कर दिया गया है। खान के अनुसार, उन्हें अभी तक आरोपपत्र की प्रति भी नहीं प्राप्त हुई है। ईडी अनिल देशमुख को कुंदन शिंदे व संजीव पलांडे को आमने-सामने बैठाकर भी पूछताछ करना चाहती है, लेकिन देशमुख ईडी द्वारा पांच बार समन भेजने के बावजूद पूछताछ के लिए उसके सामने हाजिर नहीं हुए हैं।

ईडी का आरोप है कि अनिल देशमुख ने महाराष्ट्र का गृहमंत्री रहते हुए अपने पद का दुरुपयोग कर मुंबई पुलिस के तत्कालीन एपीआई सचिन वाझे की मदद से भ्रष्टाचार को अंजाम दिया। उन्होंने वाझे के जरिए मुंबई के विभिन्न बार मालिकों से 4.70 करोड़ रुपये की वसूली करवाकर मनी लांड्रिंग के जरिए नागपुर से दिल्ली भेजवाए। बाद में यह राशि कई कागजी कंपनियों के जरिए उन्हीं के पारिवारिक ट्रस्ट श्री साईं शिक्षण संस्थान में जमा करवाई गई। हालांकि देशमुख को सर्वोच्च न्यायालय से कोई अंतरिम राहत नहीं मिली है। इसके बावजूद देशमुख अभी तक ईडी की पूछताछ से बचते आ रहे हैं।

Edited By: Sachin Kumar Mishra