नई दिल्ली प्रेट्र। एशिया के सबसे बड़े स्लम एरिया धारावी में बुधवार को मिले कोरोनावायरस (Coronavirus) संक्रमित मरीज की मौत हो गई है। 56 वर्षीय शख्स को सायन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सांस लेने में तकलीफ के बाद इस मरीज को अस्पताल में भर्ती किया गया था और उसके परिवार के सभी सदस्य क्वारंटीन कर दिए गए थे। हालांकि अस्पताल में भर्ती कराए जाने के कुछ वक्त बाद ही इस मरीज की मौत हो गई। इन लोगों का परीक्षण गुरुवार को होगा। इमारत को भी सील कर दिया गया है। बता दें कि महाराष्ट्र में COVID-19 पॉजिटिव की संख्या 300 से अधिक हो चुकी है और धारावी में कोरोना के मरीज का मिलना एक चिंता का विषय है।

धारावी के जिस इलाके में कोरोना का पॉजिटिव मरीज मिला है वहां हजारों की संख्या में झुग्गियां हैं। ऐसे में इस इलाके में संक्रमण फैलने का खतरा देखते हुए अधिकारियों के बीच हड़कंप की स्थितियां बनी हुई हैं। झुग्गियों की घनी आबादी के बीच कोरोना के मरीज के मिलने के बाद अधिकारी अब संक्रमण के खतरों को रोकने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं।

बुधवार को महाराष्ट्र में कोरोना से संक्रमित 6 मरीजों की मौत हुई है, इसके साथ ही राज्य में कोरोना के कारण मरने वालों की कुल संख्या 17 हो गई है। देश भर में बीते 24 घंटे के भीतर कोरोना के कुल 376 केस सामने आए हैं। इनमें 164 मरीज ऐसे हैं जो कि दिल्ली की तबलीगी जमात में हिस्सा लेने के बाद संक्रमित हुए थे। महाराष्ट्र में कोरोना के कुल मरीजों की संख्या 322 तक पहुंच गई है।

सील की गई इमारत

बताया जा रहा है कि यह मरीज इलाके की एक मल्टीस्टोरी बिल्डिंग में रह रहा था और अफसर अब इस इमारत को भी सील कर दिया गया है। साथ ही इस इमारत के आसपास के हिस्सों को भी सैनिटाइज कराने पर भी विचार किया जा रहा है।

5 हजार से अधिक लोग आइसोलेशन में

बता दें कि महाराष्ट्र के मुंबई में इससे पहले भी कोरोना के दर्जनों मामले सामने आ चुके हैं। मुंबई समेत प्रदेश के अन्य हिस्सों में कोरोना मरीजों के संपर्क में आने वाले 5 हजार से अधिक लोग आइसोलेशन वॉर्ड्स में रखे गए हैं। इन सभी लोगों की निगरानी के लिए सरकार की ओर से 4 हजार से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों को तैनात किया गया है।

घनी बस्तियों में फैल रहा कोरोना

मुंबई की झुग्गी-झोपड़ियां और चॉल में यह वायरस तेजी से फैल रहा है और यहां पर इसे काबू पाना प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती है। इस वायरस को रोकने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग सबसे अहम है और इन घनी बस्तियों में यह संभव नहीं हो पा रहा है। अब तक बस्तियों में आठ लोगों को कोरोना पॉजिटिव हो चुका है।

छोटे से कमरे में रहते हैं कई परिवार

सामाजिक दूरी इन मलिन बस्तियों और चॉलों संभव नहीं है। झुग्गी बस्तियों में ज्यादातर घरों में टिन की चादरें एक साथ रखी जाती हैं और यहां रहने वाले लोग सामुदायिक शौचालयों का उपयोग करते हैं। चॉलों में तो 8X10 के कमरों में सामान्यता छह लोग तक रहते हैं। यहां के लोगों में बीमारी रोकना शुरू से ही स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती रहा है।

Posted By: Sanjeev Tiwari

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