छत्रपति संभाजीनगर में थर्मोकोल की नाव से स्कूल जाने को मजबूर बच्चे, HC का कलेक्टर को आदेश- तुरंत शुरू करें बोट सर्विस
बच्चों द्वारा खतरनाक तरीके से जलाशय पार कर स्कूल जाने की समस्या पर बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने ...और पढ़ें

एआई से बनी तस्वीर।
HighLights
बॉम्बे हाई कोर्ट ने बच्चों की सुरक्षा पर सख्त रुख अपनाया।
जलाशय पार करने वाले स्कूली बच्चों के लिए नाव सेवा का आदेश।
प्रशासन को 26 अक्टूबर से सेवा शुरू करने के निर्देश दिए।
डिजिटल डेस्क, मुंबई। विशाल जलाशय को खतरनाक तरीके से पार कर स्कूल आने जाने बच्चों को हो रही परेशानी पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने प्रशासन को इस मामले में सख्त आदेश देते हुए कहा कि इसके लिए तुरंत फंड आवंटित कर 26 अक्तूबर से चालू करें।
काले वस्ती के स्कूली बच्चों को क्लास के लिए आने जाने के दौरान जलाशय को पार करना पड़ता है जो काफी खतरनाक होता है। यहां पर प्रशासन ने एक नाव और उसे चलाने वाला दे दिया, लेकिन इस सेवा को सुचारू तरीके से चलाने के लिए कोई खास इंतजाम नहीं किया जिस वजह से परेशानी बनी है।
26 अक्तूबर से सेवा शुरू करने का आदेश
मानसून के दौरान बच्चे असुरक्षित तरीके से जायकवाड़ी बैकवाटर्स को पार करते हैं। इससे उनके डूबने का खतरा बना रहता है। इस पर कोर्ट ने छत्रपति संभाजीनगर के कलेक्टर को निर्देश दिया है। निर्देश में कहा है कि प्रशासन भीव धनोरा में काले वस्ती के स्कूली बच्चों के लिए मोटर वाली नाव चलाने के लिए पैसे की व्यवस्था करे। इसके साथ ही यह पक्का करे कि सेवा तुरंत 26 अक्टूबर से शुरू हो।
जनहित याचिका पर लिया स्वतः संज्ञान
न्यायमूर्ति नितिन सूर्यवंशी और आबासाहेब शिंदे की खंडपीठ ने जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के दौरान स्वतः संज्ञान लिया। अदालत के निर्देश के बावजूद आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से उपलब्ध कराई गई नाव पिछले डेढ़ साल से बंद पड़ी है। इसकी वजह ईंधन और मोटरमैन के वेतन की कोई व्यवस्था नहीं होना सामने आई। कोर्ट ने पूरे मामले पर हैरानी भी जताई है।
बच्चे अस्थाई नाव के जरिए पार कर रहे जलाशय
ये जनहित याचिका 27 अगस्त, 2023 को छपी टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के बाद दायर की गई थी। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि गंगापुर तालुका के भीव धनोरा गांव के काले वस्ती इलाके के बच्चे, स्कूल आने जाने के लिए थर्माकोल से बनी अस्थायी नावों का सहारा ले रहे हैं। इसी के जरिए जायकवाड़ी बांध के बैकवाटर को पार करते हैं।
मानसून के दौरान होती है परेशानी
इस जलाशय का पानी गांव के बीच से होकर गुजरता है और आखिरी में शिवना नदी में मिल जाता है। इस दौरान मानसून में सबसे ज्यादा परेशानी होती है। लोगों को जान हथेली पर लेकर इस पानी को पार करना पड़ता है।
हाई कोर्ट ने 29 अगस्त 2023 को मीडिया रिपोर्ट पर संज्ञान लेकर जनहित याचिका में बदल दिया, जिसके बाद मामला सुर्खियों में आया। कोर्ट ने अधिवक्ता पुष्कर शेंदुर्नीकर को इस मामले में अदालत का सहयोगी (एमिकस क्यूरी) बनाया है।
तीन साल से चल रही सुनवाई
इस पूरे मामले में 11 सितंबर 2023 को, कोर्ट ने तत्कालीन जिला कलेक्टर को निर्देश दिया कि बच्चों के आने-जाने की सुविधा के लिए एक लाइफ जैकेट सहित नाव की व्यवस्था की जाए।
इस पर प्रशासन की ओर से इंतजाम तो कर दिया गया लेकिन चलाने को लेकर कोई पहल ना कर मामले में ढीला रवैया अपनाया। इस पर कोर्ट बताया कि इस कारण ही जनहित याचिका दर्ज की गई। इस मामले की सुनवाई तीन साल से चल रही थी।
