मुंबई, ओमप्रकाश तिवारी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चहेती परियोजना बुलेट ट्रेन न सिर्फ मुंबई-अहमदाबाद, बल्कि पूरे पश्चिम भारत को अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक केंद्र के रूप में स्थापित करने में कामयाब होगी। रेलमंत्री पीयुष गोयल ने इस परियोजना के 2023 तक पूरी हो जाने की उम्मीद जताई है। इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत 1,08,000 करोड़ रुपए आंकी जा रही है।

स्थायी संपत्तियों की दृष्टि से मुंबई दुनिया के सबसे महंगे शहरों में एक माना जाता है। अभी पिछले सप्ताह ही जापानी कंपनी सुमितोमो ने मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में तीन एकड़ का प्लॉट 2,238 करोड़ रुपयों में खरीदा है। लेकिन देश-दुनिया की बहुत सारी कंपनियां इतनी महंगी कीमत चुका पाने में असमर्थ होने के कारण मुंबई में अपना कार्यालय नहीं खोल पातीं।

मुंबई मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) के अध्यक्ष आरए राजीव का मानना है कि बुलेट ट्रेन अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की यह मुश्किल आसान कर देगी और देश की आर्थिक राजधानी मुंबई दुनिया भर के व्यावसायिक आकर्षण का केंद्र बन जाएगी। एमएमआरडीए के जिस क्षेत्र में बुलेट ट्रेन के भूमिगत स्टेशन का निर्माण हो रहा है, उसी भूखंड के ऊपर एमएमआरडीए के पास 165 एकड़ का व्यावसायिक स्थान उपलब्ध है। साथ ही उसी क्षेत्र में 36 एकड़ का आवासीय स्थान भी उपलब्ध है।

राजीव मानते हैं कि किसी कंपनी को यदि अपने व्यवसाय के लिए कुल एक लाख वर्ग मीटर जगह की जरूरत हो, तो उसे अपना फ्रंट ऑफिस चलाने के लिए सिर्फ 20,000 वर्ग मीटर जगह की ही जरूरत होती है। शेष 80,000 वर्ग मीटर का उपयोग वह कहीं भी कर सकता है। बुलेट ट्रेन शुरू हो जाने के बाद कोई भी विदेशी कंपनी अपना फ्रंट ऑफिस भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में खोलकर अपना बैक ऑफिस मुंबई से अहमदाबाद के बीच पड़ने वाले बुलेट ट्रेन के 12 स्टेशनों के नजदीक कहीं भी खोल सकती हैं। इनमें से चार स्टेशन मुंबई, ठाणे, विरार और बोइसर महाराष्ट्र में पड़ेंगे, तथा आठ स्टेशन वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आणंद, अहमदाबाद और साबरमती गुजरात में। चूंकि बुलेट ट्रेन की गति 320 किमी. प्रति घंटा होगी, इसलिए मुंबई से अहमदाबाद के बीच 508 किलोमीटर की दूरी तय करने में इसे दो घंटे से भी कम समय लगेगा। इतना समय अभी विरार, कर्जत, बदलापुर आदि स्टेशनों से लोकल ट्रेन से दक्षिण मुंबई पहुंचने में लगता है।

एमएमआरडीए अध्यक्ष के अनुसार निकट भविष्य में न सिर्फ मुंबई और अहमदाबाद, बल्कि बुलेट ट्रेन के मार्ग में पड़नेवाले सभी स्टेशनों के आसपास के क्षेत्र गुलजार हो जाएंगे। क्योंकि इन स्टेशनों से बुलेट ट्रेन के जरिए मुंबई पहुंचना आसान हो जाएगा। इसके अलावा मुंबई और गुजरात के बीच गहरा संबंध रखनेवाले वाले हीरा व्यवसाइयों के लिए भी बुलेट ट्रेन वरदान साबित होगी। चूंकि हीरा व्यापार का एशिया का सबसे बड़ा केंद्र भारत डायमंड बोर्स बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में निर्माणाधीन बुलेट ट्रेन स्टेशन के ठीक सामने स्थित है। जबकि हीरा तराशने का काम सूरत, अहमदाबाद और सौराष्ट्र में होता है। बुलेट ट्रेन शुरू हो जाने के बाद हीरा व्यवसाइयों को भी अपना माल लाने-ले जाने के लिए एक सुरक्षित माध्यम मिल जाएगा। जिसका सकारात्मक असर उनके व्यवसाय पर पड़ेगा।  

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Posted By: Sachin Mishra

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