'12 दिन शराब नहीं पीने से बिगड़ सकती है तबीयत', बॉम्बे हाई कोर्ट ने सरकार से ऐसा क्यों कहा?
बॉम्बे हाई कोर्ट ने गणेशोत्सव के दौरान पुणे में 12 दिनों के शराब प्रतिबंध पर महाराष्ट्र सरकार को कड़ी फटकार ...और पढ़ें

बॉम्बे हाई कोर्ट ने पुणे में 12 दिन की शराबबंदी को बताया तर्कही (फाइल फोटो)
HighLights
बॉम्बे हाई कोर्ट ने पुणे शराबबंदी को तर्कहीन बताया
नियमित शराब पीने वालों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता असर
सरकार को केवल अनुमान पर निर्णय नहीं लेना चाहिए
डिजिटल डेस्क, मुबंई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने गणेशोत्सव के दौरान पुणे जिले में शराब की बिक्री पर 12 दिनों के पूर्ण प्रतिबंधको लेकर महाराष्ट्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने इस पाबंदी को पूरी तरह तर्कहीन करार देते हुए कहा कि बिना किसी तार्किक आधार के इस तरह के आदेश नहीं दिए जा सकते, लोगों को शांति से अपना त्योहार मनाने दें।
कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार केवल इस अनुमान के आधार पर फैसला नहीं ले सकती कि शराब पीने वाला हर व्यक्ति त्योहार के दौरान कानून-व्यवस्था के लिए समस्या पैदा करेगा।
नियमित शराब पीने वालों की बिगड़ सकती तबीयत
बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में यह भी किया कि अचानक इतने लंबे समय तक शराबबंदी लागू करने से नियमित रूप से शराब पीने वाले लोगों में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जिससे अस्पतालों में बेवजह भीड़ बढ़ सकती है।
चीफ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की खंडपीठ ने ऐसी व्यापक शराबबंदी को तर्कहीन बताते हुए कहा कि त्योहार के दौरान कोई व्यक्ति शराब का सेवन कर उत्साह में सड़कों पर निकलता है, तो सिर्फ इस आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि वह कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा करेगा।
हालांकि, अदालत ने साथ ही स्पष्ट किया कि शराब पी हो या नहीं, यदि कोई व्यक्ति कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाली स्थिति पैदा करता है तो उसे कानून के मुताबिक कार्रवाई का सामना करना ही होगा।
आखिर सरकार क्या संदेश देना चाहती है?
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने इस तथ्य को भी गंभीरता से लिया कि 12 दिनों की शराबबंदी पूरे महाराष्ट्र में नहीं बल्कि केवल पुणे जिले के लिए लागू की गई। इस पर अदालत ने सवाल उठाया कि केवल एक शहर या जिले के खिलाफ ऐसा आदेश जारी करने से सरकार आखिर क्या संदेश देना चाहती है।
खंडपीठ ने कहा कि वह पुणे के लिए इस तरह के 12 दिन के शराब प्रतिबंध के आदेश से गंभीर रूप से असहमत है।
