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मुंडवा जमीन घोटाला: '99 प्रतिशत शेयर वाले पार्थ पवार पर कार्रवाई क्यों नहीं', बॉम्बे HC का फडणवीस सरकार से सवाल

Published: Thu, 01 Oct 2026 04:09 PM (GMT+05:30)

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंडवा जमीन घोटाले में महाराष्ट्र सरकार और पुलिस की जांच पर तीखे सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने ...और पढ़ें

बॉम्बे हाईकोर्ट।

बॉम्बे हाईकोर्ट।

HighLights

  1. बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंडवा जमीन घोटाले की जांच पर सवाल उठाए।

  2. पार्थ पवार की 99% हिस्सेदारी पर कोर्ट ने उठाए गंभीर प्रश्न।

  3. पुलिस जांच में 1% शेयरधारक को आरोपी बनाने पर हैरानी जताई।

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंडवा जमीन घोटाले के मामले में महाराष्ट्र सरकार और पुलिस की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने हैरानी जताई है कि जिस कंपनी ने भारी छूट पर सरकारी जमीन खरीदी, उसमें 99 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले पार्थ पवार को आरोपी क्यों नहीं बनाया गया, जबकि 1 प्रतिशत शेयर वाले व्यक्ति को आरोपी बना दिया गया है।

मामले में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति माधव जामदार की एकल पीठ ने पुणे के तहसीलदार सूर्यकांत येवले को अग्रिम जमानत देते हुए यह अहम टिप्पणी की। येवले पर इस विवादित सौदे को बढ़ावा देने के लिए अपने आधिकारिक पद के दुरुपयोग का आरोप है, हालांकि उन्होंने इन आरोपों से इनकार किया है।

समझिए क्या है पूरा मामला

बता दें कि पुणे के पॉश मुंडवा इलाके में सरकारी स्वामित्व वाली 40 एकड़ जमीन को 'अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी' नामक फर्म को महज 300 करोड़ रुपये में बेच दिया गया था।

यह जमीन बोटेनिकल सर्वे ऑफ इंडिया को पट्टे पर दी गई थी। आरोप है कि यह जमीन बिना किसी अनिवार्य सरकारी मंजूरी के और बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर बेची गई। इतना ही नहीं, फर्म को 21 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी से भी छूट दे दी गई थी।

कोर्ट ने पुलिस जांच पर उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने महाराष्ट्र के डीजीपी (DGP) के उस हलफनामे को स्वीकार कर लिया, जिसमें कहा गया था कि मामले में और अधिक पेशेवर और विस्तृत जांच की जरूरत है और पुणे पुलिस कमिश्नर को आगे की जांच के निर्देश दे दिए गए हैं।

हालांकि, पुलिस की शुरुआती जांच पर सवाल उठाते हुए जस्टिस जामदार ने कहा कि जांच अधिकारी के रूप में आपका रुख यह है कि जिसके पास 99 प्रतिशत शेयर हैं वह जिम्मेदार नहीं है और आरोपी वह व्यक्ति है जिसके पास 1 प्रतिशत शेयर हैं। क्या 99 प्रतिशत शेयर रखने वाले पार्थ पवार इस सौदे के लाभार्थी नहीं हैं?

सिविल कोर्ट ने रद किया था सौदा

हालांकि इससे पहले पिछले साल हुए इस खुलासे के बाद विवाद बढ़ गया था, जिसके बाद इस साल जुलाई में पुणे की एक सिविल अदालत ने इस विवादित बिक्री विलेख को रद करने का आदेश दिया था।

गौरतलब है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) नेता और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के बेटे तथा राज्यसभा सांसद पार्थ पवार इस फर्म में बहुसंख्यक पार्टनर और निदेशक हैं। उनके वकीलों और पुलिस की शुरुआती जांच के बीच अब इस मामले में आगे की कानूनी और पुलिस कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।