मुंबई में पानी की कमी से निपटने की बड़ी तैयारी, BMC ने कुओं की मरम्मत के लिए हर वार्ड को दिए 30 लाख रुपये
मुंबई में पानी की कमी को देखते हुए बीएमसी ने जल संरक्षण के लिए बड़ा कदम उठाया है। प्रत्येक वार्ड ...और पढ़ें

(AI से बनाई गई सांकेतिक तस्वीर)
HighLights
बीएमसी ने पानी की बर्बादी रोकने को उठाया कदम।
प्रत्येक वार्ड को 30 लाख रुपये आवंटित, कुओं का होगा जीर्णोद्धार।
कुएं के पानी का उपयोग गैर-पेयजल कार्यों में किया जाएगा।
डिजिटल डेस्क, मुंबई। मुंबई में घटते जल स्तर और पानी की किल्लत की चिंताओं के बीच बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने एक अहम कदम उठाया है।
पीने योग्य शुद्ध पानी की बर्बादी रोकने और उसका इस्तेमाल गैर-जरूरी या घरेलू सेकेंडरी कामों में बंद करने के लिए बीएमसी ने शहर के सभी 24 प्रशासनिक वार्डों को 30-30 लाख रुपये आवंटित किए हैं। जरूरत पड़ने पर वार्डों को और अतिरिक्त फंड भी दिया जाएगा।
कुओं की सफाई से लेकर पंप लगाने तक का काम
मामले में अतिरिक्त नगर आयुक्त अभिजीत बांगर ने बताया कि निगम ने कुओं के कायाकल्प के लिए दरें तय कर ली हैं। इस प्रक्रिया में गंदे पानी को निकालना, कुओं की गहरी सफाई करना और पंप लगाना शामिल है।
हालांकि, बीएमसी का यह भी मानना है कि केवल कुओं की सफाई से काम नहीं चलेगा। इसके लिए वार्ड स्तर पर अधिकारियों को ऐसे कुओं की पहचान करनी होगी और हाउसिंग सोसाइटियों या झुग्गी बस्तियों के साथ मिलकर संपर्क स्थापित करना होगा, ताकि कुएं के इस पानी का इस्तेमाल बागवानी, सफाई या अन्य गैर-पेयजल कार्यों के लिए किया जा सके।
बांगर ने साफ किया कि अगर पानी का सही इस्तेमाल सुनिश्चित नहीं किया गया, तो केवल कुएं के कायाकल्प से कोई फायदा नहीं होगा। अगर किसी वार्ड को 30 लाख से ज्यादा की जरूरत होगी, तो हम अतिरिक्त फंड मुहैया कराएंगे।
मुंबई में 4000 से ज्यादा कुएं
बता दें कि मुंबई शहर में 4000 से अधिक कुएं मौजूद हैं, लेकिन बीएमसी सभी को एक साथ पुनर्जीवित नहीं कर रही है। जब तक पानी के उपयोग की पुख्ता व्यवस्था नहीं बन जाती, तब तक चुनिंदा कुओं पर ही काम किया जाएगा।
वर्तमान में सातों झीलों से आने वाले शुद्ध पेयजल का उपयोग हर काम में हो रहा है, जिससे भारी मात्रा में साफ पानी बर्बाद होता है। कुओं के पानी के इस्तेमाल से झीलों के पानी की बचत होगी।
वितरण की समस्या भी चिंता का विषय
अभिजीत बांगर ने यह भी माना कि पानी की 10% कटौती पूरे शहर में एक जैसी लागू नहीं हो पा रही है। वितरण नेटवर्क की समस्याओं के कारण सप्लाई के अंतिम छोर पर बसे इलाकों और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में दबाव कम होने से लोगों को ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पुराने परिसरों या चालों में भूमिगत पानी की टंकी न होने के कारण वहां के लोगों को वास्तव में 20% से 30% तक पानी की कमी झेलनी पड़ रही है।
मानसून के बाद क्यों चिंता में है BMC?
गौरतलब है कि इस साल मानसून की विदाई के बाद मुंबई की झीलों का जलस्तर 100% क्षमता तक नहीं पहुंच पाया है, जिससे अधिकारी चिंतित हैं। इसके अलावा, अल नीनो की स्थितियों के कारण अक्टूबर और नवंबर में तापमान अधिक रहने और वाष्पीकरण बढ़ने की आशंका है।
दूसरी ओर, पानी के प्रबंधन के लिए बीएमसी राज्य सरकार के आरक्षित स्टॉक और मौजूदा 10% पानी की कटौती पर निर्भर है। फिलहाल कटौती बढ़ाने की कोई योजना नहीं है, मार्च और अप्रैल में हालात की समीक्षा के बाद ही अगला फैसला लिया जाएगा।
