विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

लंच में प्याज-लहसुन और नॉन-वेज लाने पर बैन, महाराष्ट्र में बीजेपी विधायक के स्कूल में फरमान जारी

Published: Thu, 10 Sep 2026 09:40 AM (IST)

भाईंदर के सेवन स्क्वायर स्कूल ने जैन पर्व पर्यूषण के दौरान छात्रों के टिफिन में मांसाहारी भोजन, प्याज, लहसुन और ...और पढ़ें

एआई से बनाई गई सांकेतिक तस्वीर।

एआई से बनाई गई सांकेतिक तस्वीर।

HighLights

  1. स्कूल ने पर्यूषण पर्व पर टिफिन में मांसाहारी भोजन, प्याज-लहसुन प्रतिबंधित किया।

  2. मनसे ने स्कूल के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, धार्मिक प्रथा थोपने का आरोप।

  3. शिक्षा विभाग ने कहा, ऐसे फैसले के लिए पीटीए की मंजूरी अनिवार्य है।

डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र के भाईंदर में भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता के स्वामित्व वाले 'सेवन स्क्वायर स्कूल' का एक सर्कुलर इन दिनों काफी चर्चा में है। चर्चा इतनी है कि इसको लेकर अब सियासत भी तेज हो गई है और विवाद भी।

पूरे मामले को ऐसे समझिए कि स्कूल प्रशासन ने जैन समुदाय के आठ दिवसीय 'पर्यूषण' पर्व के दौरान छात्रों के टिफिन में नॉन-वेज मांस-मछली के साथ-साथ प्याज, लहसुन, आलू और अन्य जमीन के नीचे उगने वाली सब्जियों को लाने पर रोक लगा दी है।

अब मनसे ने दर्ज कराई शिकायत

स्कूल प्रशासन ने फरमान तो जारी कर दिया। हालांकि राजनीति तेज तब हो जब इस फरमान के सामने आने के बाद महाराष्ट्र नव निर्माण सेना (मनसे) ने कड़ी आपत्ति जताते हुए स्कूल के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। मनसे का आरोप है कि स्कूल प्रशासन बच्चों पर खास धार्मिक प्रथाएं और नियम थोपने की कोशिश कर रहा है।

दूसरी तरफ, स्कूल के मालिक और भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने अपने इस फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा कि इस कदम का मकसद सिर्फ बच्चों को सात्विक और स्वस्थ भोजन खाने के लिए प्रेरित करना है।

अभिभावकों और शिक्षा विभाग की आपत्ति

गौर करने वाली बात यह है कि अब यह मामला केवल राजनीति और आरोप-प्रत्यारोप तक नहीं रहा। इस मामले पर शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि स्कूल इस तरह का कोई भी बड़ा फैसला अपनी मर्जी से नहीं ले सकता, ऐसा करने के लिए पेरेंट्स-स्कूल रिप्रेजेंटेटिव बॉडी (PTA) की मंजूरी होना अनिवार्य है।

वहीं, एक अभिभावक ने नाराजगी जताते हुए कहा कि हर कोई अपने निजी विश्वास और धर्म को मानता है, लेकिन इस तरह के नियमों को छोटे बच्चों पर जबरन थोपा नहीं जाना चाहिए।