एक्ट्रेस भाग्यश्री की गणपति आरती से सामने आया पटवर्धन राजघराने का उत्तराधिकार विवाद, क्या है पूरा मामला?
अभिनेत्री भाग्यश्री द्वारा सांगली गणपति मंदिर में आरती करने से पटवर्धन राजघराने का उत्तराधिकार विवाद फिर सामने आ गया है।


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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज्य ब्यूरो, मुंबई। सांगली के आराध्यदेव श्री गणपति पंचायतन संस्थान में गणेशोत्सव की एक आरती ने पटवर्धन राजघराने के भीतर चल रहे उत्तराधिकार के विवाद को फिर सार्वजनिक कर दिया है। यह आरती पटवर्धन राज घराने की सबसे बड़ी बेटी एवं अभिनेत्री भाग्यश्री द्वारा की गई थी।
इस विवाद को समझने के लिए पहले परिवार के रिश्तों और संस्थान की धार्मिक परंपरा को समझना जरूरी है। आरती करने वाली अभिनेत्री भाग्यश्री पटवर्धन, सांगली संस्थान के प्रमुख श्रीमंत विजयसिंहराजे पटवर्धन की सबसे बड़ी बेटी हैं। वहीं आदित्यराजे पटवर्धन विजयसिंहराजे के दत्तक पुत्र और घोषित युवराज यानी उत्तराधिकारी हैं।
विजयसिंहराजे ने स्पष्ट किया है कि संस्थान की गद्दी के उत्तराधिकारी के रूप में आदित्यराजे ही उनकी पसंद हैं। गणेश चतुर्थी के अवसर पर सांगली के ऐतिहासिक गणपति मंदिर में उत्सवमूर्ति भगवान गणेश की प्रतिष्ठापना से पहले आरती होनी थी। इस धार्मिक विधि में युवराज आदित्यराजे को शामिल होना था।
इसी दौरान भाग्यश्री मंदिर पहुंचीं और उन्होंने गर्भगृह में जाकर आरती कर दी। इसके बाद संस्थान के प्रबंधन और भाग्यश्री के बीच कहासुनी की खबर सामने आई। कुछ ही देर में मामला मंदिर की आरती से निकलकर परिवार के उत्तराधिकार तक पहुंच गया।
भाग्यश्री का कहना है कि वह इस मंदिर और परिवार की गणेशोत्सव परंपरा से बचपन से जुड़ी रही हैं। उनके अनुसार, पिता की तबीयत ठीक नहीं रहने की स्थिति में परिवार की किसी बेटी को आगे आकर परंपरा निभानी चाहिए। इसी भावना से उन्होंने आरती की। लेकिन उनके पिता विजयसिंहराजे ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।
उनका कहना है कि वह स्वस्थ हैं और संस्थान की परंपरा को किसी व्यक्ति की सुविधा के अनुसार नहीं बदला जा सकता। उन्होंने साफ किया कि आरती और धार्मिक विधियों में उत्तराधिकारी की भूमिका को लेकर वर्षों से चली आ रही व्यवस्था का पालन होना चाहिए।
बता दें कि सांगली के गणपति पंचायतन संस्थान का गणेशोत्सव पटवर्धन परिवार की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गणेशोत्सव के दौरान संस्थान की उत्सवमूर्ति की प्रतिष्ठापना, पूजा और आरती जैसे प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानों में राजपरिवार के मुखिया और उत्तराधिकारी की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।
इसी कारण इस बार आरती में युवराज आदित्यराजे की जगह भाग्यश्री के शामिल होने को महज धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उत्तराधिकार के संदर्भ में भी देखा गया। विजयसिंहराजे का कहना है कि प्रतिष्ठापना की पूजा संपन्न होने के बाद दोबारा मंदिर में जाकर पूजा या आरती करना संस्थान की परंपरा के अनुरूप नहीं है। उन्होंने भाग्यश्री की कार्रवाई को गलत बताते हुए कहा कि परिवार के सभी सदस्यों को सम्मान प्राप्त है, लेकिन धार्मिक अधिकार और उत्तराधिकारी की भूमिका अलग विषय हैं।
पटवर्धन परिवार की मौजूदा स्थिति में अभिनेत्री भाग्यश्री विजयसिंहराजे की तीन बेटियों में सबसे बड़ी हैं। दूसरी ओर आदित्यराजे को विजयसिंहराजे ने दत्तक पुत्र के रूप में स्वीकार कर उत्तराधिकारी घोषित किया है। पिछले कुछ वर्षों में संस्थान के कामकाज को लेकर परिवार में मतभेद भी सामने आते रहे हैं।
कुछ समय तक भाग्यश्री के पति हिमालय दासानी संस्थान के कामकाज से जुड़े रहे थे। बाद में उनके अधिकार वापस लिए गए। इसके बाद संस्थान के संचालन की जिम्मेदारी अलग व्यवस्था के तहत चलती रही और आदित्यराजे को उत्तराधिकारी घोषित किया गया।
