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अमित शाह ने राजभाषा सम्मेलन में भारतीय भाषाओं के महत्व पर दिया जोर

Published: Mon, 14 Sep 2026 08:59 PM (IST)

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में कहा कि भारत की सांस्कृतिक विविधता उसकी शक्ति ...और पढ़ें

अमित शाह ने राजभाषा सम्मेलन में भारतीय भाषाओं के महत्व पर दिया जोर (फोटो- PTI)

अमित शाह ने राजभाषा सम्मेलन में भारतीय भाषाओं के महत्व पर दिया जोर (फोटो- PTI)

HighLights

  1. सांस्कृतिक विविधता भारत की शक्ति है, राष्ट्रीय भावना एक रहनी चाहिए।

  2. मातृभाषा में शिक्षा अनिवार्य, भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना आवश्यक।

  3. हिंदी को संवाद की भाषा बनाएं, प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं।

राज्य ब्यूरो, मुंबई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विविधता उसकी शक्ति है। देश की भाषाएं और उनके स्वर अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन राष्ट्रीय भावना एक रहनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए सभी राजनीतिक मतभेदों को किनारे रखना होगा। बच्चे को भारत की वास्तविक समझ उसकी मातृभाषा के माध्यम से ही हो सकती है।

छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का अर्थ देश की संस्कृति और इतिहास के प्रति जागरूकता पैदा करना है।

उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि तिलक ने सार्वजनिक गणेश उत्सव और छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती के आयोजन शुरू किए। बाद में ये उत्सव महाराष्ट्र से बाहर भी फैले और देश में राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करने में मदद मिली।

गृह मंत्री ने कहा कि हिंदी को भारतीय भाषाओं के बीच प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं, बल्कि संवाद और संपर्क की भाषा बनना चाहिए। उन्होंने बताया कि 'हिंदी शब्द सिंधु' में शुरुआत में 51 हजार शब्द थे, जो अब बढ़कर आठ लाख हो चुके हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्ष 2029 तक यह दुनिया का सबसे बड़ा शब्दकोश बन जाएगा।

शाह के अनुसार, हिंदी में जिन शब्दों की कमी थी, उसे पूरा करने के लिए भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं के 50 हजार से अधिक शब्द इसमें शामिल किए गए हैं। तमिल, तेलुगु, मराठी, गुजराती, बंगाली और ओडिया समेत विभिन्न भाषाओं के शब्दों को अपनाया गया है। इससे हिंदी अधिक समृद्ध और लचीली बनी है।

उन्होंने महाराष्ट्र को देश की सबसे बहुभाषी संस्कृति वाला राज्य बताते हुए कहा कि यहां मराठी, कोंकणी, गुजराती, सिंधी, हिंदी, कन्नड़ और वारली जैसी भाषाएं बोली और विकसित होती हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया है।

अमित शाह ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में देने को अनिवार्य किया गया है। साथ ही विद्यार्थियों के लिए मातृभाषा के अलावा एक अन्य भारतीय भाषा सीखने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि इसका विरोध करने वाले लोग नहीं जानते कि वे किस अवसर का विरोध कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि आईएएस और आईपीएस जैसी परीक्षाओं में अभ्यर्थी अपनी मातृभाषा में परीक्षा दे सकते हैं। जेईई, नीट और स्नातक स्तर की परीक्षाएं भी 13 भाषाओं में आयोजित की जा रही हैं।

गृह मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार का लक्ष्य भारतीय भाषाओं को शासन और विज्ञान की भाषा बनाना है। इसके लिए साहित्य के माध्यम से भाषाओं को समृद्ध किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पांच लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों को भाषा प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

राजभाषा विभाग ने बहुभाषी अनुवाद उपकरण 'भारती' विकसित किया है, जबकि 'भारतीय भाषा अनुभाग' की स्थापना भी की गई है। एआई आधारित 'कंठस्थ 2.0' में पांच करोड़ से अधिक वाक्य उपलब्ध हैं और इसे विदेशी नागरिकों के लिए भी उपलब्ध कराया गया है। 'लीला राजभाषा' और 'लीला प्रवाह' जैसे संसाधन भी भाषा सीखने में मदद कर रहे हैं।

अमित शाह ने 'वंदे मातरम्' को भारतीय चेतना और स्वतंत्रता संघर्ष से जोड़ते हुए कहा कि इसे अपनी पूरी गरिमा हासिल करने में 80 वर्ष लगे। उन्होंने कहा कि यह केवल गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता के लिए भारतीय चेतना जगाने का प्रयास था और इसने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की नींव रखी।

उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके लिए 'स्वराज', 'स्वधर्म' और 'स्वभाषा' स्वशासन के अभिन्न अंग थे। शाह ने कहा कि भारतीय संस्कृति और साहित्य कई पंखुड़ियों वाले कमल के समान हैं और प्रत्येक क्षेत्रीय भाषा उसकी एक पंखुड़ी है। भाषाएं अनेक रह सकती हैं, लेकिन भावना भारतीय और भारत की आवाज एक रहनी चाहिए।