मुंबई, राज्य ब्यूरो महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के कार्यकाल में स्वीकृत 14 सिंचाई परियोजनाओं की 94 निविदाएं रद्द कर दीं। इन सभी मामलों में पवार एवं उनके राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा जांच चल रही है।

उक्त निविदाएं रद्द करने का निर्णय मंगलवार को मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया। पूर्व की संप्रग सरकार में सिंचाई मंत्री रहे अजीत पवार एवं सुनील तटकरे पर सिंचाई परियोजनाओं में 70,000 करोड़ रुपयों का घोटाला करने का आरोप है। इस मामले में आम आदमी पार्टी की कार्यकर्ता रही अंजली दमानिया द्वारा उच्चन्यायालय में एक याचिका दायर कर जांच की मांग की गई है। भाजपा भी सत्ता में आने से पहले यह मामला जोर-शोर से उठाती रही है। भाजपा सांसद किरीट सोमैया ने कुछ माह पहले यह दावा भी किया था कि इस मामले में अजीत पवार एवं सुनील तटकरे की दीवाली इस बार जेल में गुजरेगी। माना जा रहा है कि भाजपानीत सरकार के मंत्रिमंडल द्वारा आज लिया गया निर्णय उसी दिशा में बढ़ाया गया एक कदम है।

बता दें कि इसी सिंचाई घोटाले में पिछली सरकार के कार्यकाल में मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चह्वाण द्वारा श्वेतपत्र लाए जाने की घोषणा के बाद ही अजीत पवार ने इस्तीफा दे दिया था। लेकिन बाद में एक जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद पवार ने पुनः उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली थी। हालांकि अब तक किसी भी जांच में उन्हें क्लीनचिट नहीं दी गई है। साथ ही, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की जांच भी अभी चल ही रही है। माना जा रहा है कि यदि फड़नवीस सरकार ने इस यह जांच निश्पक्ष रूप से आगे बढ़ाई तो अजीत पवार एवं तटकरे की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। राकांपा के एक दिग्गज नेता छगन भुजबल पहले से ही दिल्ली स्थित महाराष्ट्र सदन निर्माण घोटाले में जेल की हवा खा रहे हैं।

Posted By: Bhupendra Singh