8 महीने की प्लानिंग और तीन टीमें... टाइगर श्रॉफ पर हमले के पीछे की कहानी
अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने 8 महीने की प्लानिंग के बाद इस हमले को अंजाम दिया।

टाइगर पर हमले की पीछे की कहानी।
HighLights
टाइगर श्रॉफ पर हमले की 8 महीने की साजिश।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली हमले की जिम्मेदारी।
सलमान खान से संबंध और वसूली मुख्य मकसद।
डिजिटल डेस्क, मुंबई। फिल्म अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले को लेकर चौंकाने वाली बात सामने आई है। टाइगर पर हमला करने के लिए पिछले आठ महीने से प्लानिंग हो रही थी और इसके लिए तीन टीमें बनाई गई थीं। इस हमले में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम सामने आया है।
18 अक्टूबर की शाम को जब 36 वर्षीय अभिनेता फुटबॉल खेलने के बाद जुहू स्थित पुष्पा नरसी पार्क (जिसे पुष्पा नरसी ग्राउंड के नाम से भी जाना जाता है) से बाहर निकल रहे थे तब कम से कम दो लोगों ने उनकी कार पर गोलियां चलाईं।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग के गुर्गे ने ली हमले की जिम्मेदारी
घटना के कुछ ही समय बाद लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के सदस्य अनिल पंडित ने हमले की जिम्मेदारी ली। उसने इसका कारण यह बताया कि टाइगर अभिनेता सलमान खान के करीबी हैं, जिन्हें यह गिरोह काले हिरण के शिकार मामले को लेकर निशाना बनाने की कोशिश कर रहा है।
आठ महीने की प्लानिंग के बाद हमला
- हमले की जांच जैसे-जैसे तेज हो रही है, जांचकर्ताओं को पता चला है कि पंडित और उसके साथियों ने गोलीबारी की घटना की साजिश रचने में आठ महीने तक प्लानिंग की थी।
- सूत्रों के अनुसार, साजिशकर्ताओं को तीन समूहों में बांटा गया था और हमले को अंजाम देने के लिए हर समूह को अलग-अलग काम सौंपे गए थे। पहले समूह का मुख्य काम रेकी करना और टारगेट के बारे में अहम जानकारी जुटाना था।
- दूसरे समूह ने हथियारों का इंतजाम किया, जबकि तीसरे समूह की जिम्मेदारी इन हथियारों को मुंबई तक पहुंचाने की थी।
- पंडित इस पूरे ऑपरेशन का मुख्य फाइनेंसर था, जिसने पूरे काम के लिए बड़ी आर्थिक मदद मुहैया कराई।
क्यों किया गया टाइगर पर हमला
जांच में यह भी पता चला है कि यह हमला कथित तौर पर पैसे वसूलने, गिरोह का दबदबा कायम करने और फिल्म उद्योग के भीतर डर का माहौल बनाने के लिए नियोजित किया गया था।
एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप्लिकेशन जरिए बातचीत
गैंगस्टरों ने आठ महीनों तक बातचीत करने के लिए सिग्नल और जंगी जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप्लिकेशन का इस्तेमाल किया। इन दोनों ऐप्स का इस्तेमाल इंटरनेट के जरिए बातचीत करने के लिए किया जा सकता है और इनके लिए रजिस्ट्रेशन के समय मोबाइल नंबर की जरूरत नहीं पड़ती।
आठ महीने तक चली साजिश के दौरान भेजे गए संदेशों को डिकोड करना पुलिस के लिए एक चुनौती बन गया है। जांच में पता चला है कि इस मामले में अब तक गिरफ्तार किए गए 11 लोगों में से तीन रेहान, प्रांजल और कुणाल इन ऐप्स के जरिए मास्टरमाइंड पंडित के सीधे संपर्क में थे। पंडित का पता लगाने के लिए इन चैट्स की जांच की जा रही है।
