9 गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स, कैलकुलेटर से तेज दिमाग... 16 साल के आर्यन शुक्ला कैसे बने वर्ल्ड चैंपियन?
नासिक के 16 वर्षीय आर्यन शुक्ला ने 9 गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड और 2 मेंटल कैलकुलेशन वर्ल्ड कप जीतकर दुनिया के नंबर वन ह्यूमन कैलकुलेटर का खिताब हासिल किया है।

नासिक के आर्यन शुक्ला दुनिया के नंबर वन ह्यूमन कैलकुलेटर (फोटो- ANI)
HighLights
नासिक के आर्यन शुक्ला दुनिया के नंबर वन ह्यूमन कैलकुलेटर।
9 गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड और 2 मेंटल कैलकुलेशन वर्ल्ड कप जीते।
उनकी सफलता गिरते गणित स्कोर के बीच प्रेरणादायक है।
डिजिटल न्यूज, मुबंई। महाराष्ट्र के नासिक में 6 जुलाई 2010 में जन्मे आर्यन शुक्ला ने अपने हुनर से एक ऐसा मुकाम हासिल कर लिया जहाँ तक पहुंच पाना किसी के लिए बहुत बड़ी बात है। आर्यन ने पिछले दस सालों में मैंथल मैथ को एक असली स्पोर्टस में बदल दिया है।
इस सफर ने उन्हें नासिक के एक साधारण घर से जर्मनी, इटली, दुबई, रूस और सऊदी अरब के मंचों तक पहुंचाया है। आज वो दुनिया के नंबर वन ह्यूमन कैलकुलेटर हैं जिनके नाम नौ गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड और दो मेंटल कैलकुलेशन वर्ल्ड कप का खिताब है।
नासिक के साधारण परिवार में हुआ आर्यन का जन्म
आर्यन का जन्म 6 जुलाई 2010 को नासिक के एक साधारण परिवार में हुआ था। उनके पिता नितिन शुक्ला एक बिजनेसमैन है और उनकी माँ मीनल शुक्ला पहले IT सेक्टर में काम करती थीं। आर्यन दिल्ली पब्लिक स्कूल नासिक में पढ़ते थें और मेंटल कैलकुलेशन के अलावा उन्हें क्रिकेट, फ़ुटबॉल और पढ़ना पसंद है।
आर्यन के पिता के मुताबिक आर्यन ने सिर्फ 6 साल की उम्र में मेंटल कैलकुलेशन की प्रैक्टिस शुरू कर दी थी। उनकी शुरुआती दिलचस्पी जल्द ही सबके सामने आ गई और आठ साल की उम्र तक वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने लगे थे।
12 साल की उम्र में बने वर्ल्ड चैंपियन
2018 में इस्तांबुल में हुई 'मेमोरियाड टर्की ओपन चैंपियनशिप' में आर्यन ने 7 गोल्ड मेडल समेत कुल 10 मेडल जीते। यह उपलब्धि आज भी उस इवेंट में एक अटूट रिकॉर्ड बनी हुई है।
आर्यन की जिंदगी में असली मोड़ 2022 में आया, जब उन्होंने 'मेंटल कैलकुलेशन वर्ल्ड कप' में हिस्सा लेने के लिए जर्मनी के पैडरबोर्न गए। ये इवेंट हर दो साल में एक बार होता है और इसमें दुनिया के टॉप 40 ह्यूमन कैलकुलेटर ही हिस्सा ले सकते हैं।
सिर्फ 12 साल की उम्र में वे वर्ल्ड चैंपियन बने और उन्होंने कई सालों के अनुभव वाले बड़ों को हराया। दो साल बाद, सितंबर 2024 में, उन्होंने न सिर्फ अपना खिताब बरकरार रखा, बल्कि उस पर अपना दबदबा भी बनाया। उन्होंने सभी छह ट्रॉफ़ी जीतीं और 900 में से 819.84 पॉइंट हासिल किए, साथ ही पाँच नए वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाए।
एक ही दिन में बनाये 6 वर्ल्ड रिकॉर्ड
दिसंबर 2024 में आर्यन के करियर में सबसे हैरान करने वाला पल आया, गिनिज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने उन्हें दुबई में अपने ऑफिस में रिकॉर्ड बनाने के लिए बुलाया गया। हर कैटेगेरी में सिर्फ तीन कोशिशों की इजाजत के बाद भी आर्यन ने एक ही दिन में 6 नए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए। इनमें 50 पांच-अंकों वाली संख्याओं को मन ही मन सबसे तेज़ी से जोड़ने (18.71 सेकंड) और दो पांच-अंकों वाली संख्याओं का सबसे तेज़ी से गुणा करने (51.69 सेकंड) का रिकॉर्ड शामिल है।
आर्यन भारत के ऐसे अकेले व्यक्ति हैं जिन्होंने यह कारनामा किया है। इससे पहले, उन्होंने फरवरी 2024 में इटली के मिलान में टीवी शो 'लो शो देई रिकॉर्ड' पर अपना पहला व्यक्तिगत गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था, जिसमें उन्होंने सिर्फ 25.19 सेकंड में मन ही मन 50 पांच-अंकों वाली संख्याओं को सही-सही जोड़ा था।
आर्यन की कामयाबी पर माता-पिता को नाज
आर्यन के पिता नितिन शुक्ला ने एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया को दिये इंटरव्यू में अपने बेटे की इस अनोखी काबिलियत के बारे में बात कही। इंटरव्यू में उन्होंने कहा, 'कैलकुलेशन की यह असाधारण क्षमता उनके परिवार में पहले से नहीं थी। हम एक सामान्य परिवार हैं।
आर्यन अरबों में एक तरह का इंसान है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि हमारा परिवार मेंटल कैलकुलेटर वाला परिवार है।' आर्यन के इस अनोखे हुनर के बारे में बात करते हुए उनके पिता ने बताया कि आर्यन ने 6 साल की उम्र में ही नंबरो में बहुत ज्यादा दिलचस्पी दिखाई थी और सिर्फ 6 से 8 महीने की प्रैक्टिस के बाद ही वह ऐसे चीजे करने लगा था जो उसकी उम्र के आम बच्चे नहीं कर पाते।
आर्यन की कामयाबी ने खोले नए रास्ते
आर्यन की कामयाबियों ने उनके लिए कॉम्पिटिशन हॉल से आगे के रास्ते खोल दिए हैं। वह रूस के टैलेंट शो "द अमेज़िंग पीपल" में शामिल हुए, उन्हें इटैलियन मेंटल कैलकुलेशन चैंपियनशिप 2026 में गेस्ट ऑफ ऑनर के तौर पर बुलाया गया। साथ ही उन्होंने रियाद में मिस्क ग्लोबल फोरम में दुनिया भर के युवा नेताओं के साथ बात की और न्यूयॉर्क के नेशनल म्यूज़ियम ऑफ मैथमेटिक्स के लिए गणितज्ञ डॉ. आर्थर बेंजामिन के ऑनलाइन सेशन में भी हिस्सा लिया।
अपने देश में, उन्होंने 2025 में CNN-News18 राइज़िंग भारत समिट में भारत के प्रधानमंत्री मोदी के साथ मंच साझा किया और अंतरराष्ट्रीय कॉम्पिटिशन के लिए महाराष्ट्र राज्य सरकार से आर्थिक मदद भी हासिल की।
अपनी उम्र के बच्चों से क्यों अलग है आर्यन?
मात्र 16 साल की उम्र में दुनिया भर में नाम कमाने वाले आर्यन अपनी उम्र की बच्चों से काफी अलग हैं। जहाँ ज्यादातर 16 साल के बच्चे स्कूल के असाइनमेंट और स्क्रीन टाइम के बीच उलझे रहते हैं, वहीं आर्यन ने पिछले दस सालों में मेंटल मैथ को एक असली स्पोर्ट्स करियर में बदल दिया है।
आर्यन ने अपनी इस स्किल के पीछे के अनुशासन की वजह अनुशासन बताई। उन्होंने बताया है कि इसके लिए रेगुलर प्रैक्टिस, फोकस और प्रतिभा के साथ-साथ रोजाना कोशिश करने की भी जरूरत होती है।
क्यों अहम है आर्यन की कहानी?
आर्यन की कामयाबी ऐसे समय में सामने आई है जब भारतीय छात्रों में बेसिक गणित की क्षमता को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं और उन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
'एनुअल स्टेटस ऑफ़ एजुकेशन रिपोर्ट'(ASER) 2022 के अनुसार, देश भर में बच्चों की बेसिक गणित की क्षमता 2018 के स्तर पर आ गई थी। सरकारी और प्राइवेट, दोनों तरह के स्कूलों में यह गिरावट देखी गई।
दुनिया भर में भी, हालिया PISA 2025 असेसमेंट में पाया गया कि इसमें शामिल देशों में गणित के स्कोर गिर रहे हैं। यह गिरावट का छात्रों में कम होते अटेंशन स्पैन और बढ़ते डिजिटल डिस्ट्रैक्शन से जुड़ा है। ऐसे माहौल में, एक टीनएजर का बिना किसी डिवाइस के मुश्किल कैलकुलेशन हल करने के लिए रोजाना घंटों तक अपने दिमाग को ट्रेन करना, आम चलन से बिल्कुल अलग और अनोखा लगता है।
जब हर कोई साधारण सी कैलकुलेशन के लिए कैलकुलेटर का इस्तेमाल कर रहा है ऐसे में आर्यन का ये हुनर ये बताता है कि अगर इंसानी दिमाग को लगातार ट्रेन किया जाए तो वो कमाल की क्षमता का प्रदर्शन कर सकता है।
