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जबलपुर में स्वामी सदानंद सरस्वती ने धर्मस्थलों की आर्थिक सुरक्षा के लिए ‘सनातन बोर्ड’ गठन की उठाई मांग

By Surendra DubeyEdited By: Ravindra Soni
Published: Tue, 16 Jun 2026 08:05 PM (GMT+05:30)

द्वारिका शारदा पीठ के स्वामी सदानंद सरस्वती ने धर्मस्थलों की धार्मिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए एक स्वतंत्र 'सनातन बोर्ड' ...और पढ़ें

स्वामी सदानंद सरस्वती, द्वारिका-शारदा पीठ प्रमुख।

स्वामी सदानंद सरस्वती, द्वारिका-शारदा पीठ प्रमुख।

HighLights

  1. धर्मस्थलों की सुरक्षा हेतु स्वतंत्र 'सनातन बोर्ड' के गठन की मांग।

  2. बोर्ड में चारों पीठ के स्वामी और अखाड़ा परिषद के संत शामिल हों।

  3. स्वामी सदानंद ने गाय को 'राष्ट्रमाता' का दर्जा देने की मांग भी दोहराई।

सुरेंद्र दुबे, जबलपुर। धर्मस्थलों की धार्मिक और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए देश में एक स्वतंत्र ‘सनातन बोर्ड’ के गठन की आवश्यकता बता कर द्वारिका शारदा पीठ के स्वामी सदानंद सरस्वती ने विमर्श को स्वर दिया है। उन्होंने कहा कि मंदिरों, तीर्थस्थलों और सनातन परंपरा से जुड़े धार्मिक संस्थानों के संरक्षण, प्रबंधन और मर्यादा की रक्षा के लिए ऐसा बोर्ड गठित किया जाना चाहिए, जिसमें आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चारों मान्य पीठ के स्वामियों के साथ विभिन्न परंपराओं के पीठाधीश्वर एवं अखाड़ा परिषद के शीर्ष संत शामिल हों।

सनातन संस्कृति की जीवंत धरोहर हैं धर्मस्थल

स्वामी सदानंद सरस्वती ने जबलपुर के सिविक सेंटर स्थित मां बगलामुखी सिद्ध पीठ में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि तीर्थ और धर्मक्षेत्र केवल आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि सनातन संस्कृति की जीवंत धरोहर हैं। इसलिए वहां धर्मसम्मत विधि-निषेध और परंपराओं का पालन सुनिश्चित होना चाहिए।

गाय को 'राष्ट्रमाता' का दर्जा देने की मांग

उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थानों की स्वायत्तता और सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंतन की आवश्यकता है। उन्होंने गोसंरक्षण के मुद्दे पर कहा कि हिंदू समाज लंबे समय से गोमाता को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा देने की मांग करता रहा है। अनेक सरकारों और प्रधानमंत्रियों के बदलने के बावजूद यह मांग अब तक पूरी नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि गोसंरक्षण केवल धार्मिक नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक चेतना से जुड़ा विषय है।

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