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पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में अतिक्रमण कर बने रिसॉर्ट पर उठे सवाल, बंदूकधारी गार्डों की मौजूदगी से बढ़ी चिंता

By Sanjay Kumar SharmaEdited By: Ravindra Soni
Published: Thu, 30 Jul 2026 06:07 PM (IST)

पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में एक अवैध रिसॉर्ट और बंदूकधारी गार्डों की मौजूदगी पर गंभीर सवाल उठे हैं। ...और पढ़ें

विवादित रिसॉर्ट परिसर के अंदर मौजूद बंदूकधारी गार्ड। (सौजन्य- वन विभाग)

विवादित रिसॉर्ट परिसर के अंदर मौजूद बंदूकधारी गार्ड। (सौजन्य- वन विभाग)

HighLights

  1. पन्ना टाइगर रिजर्व कोर क्षेत्र में अवैध रिसॉर्ट बना।

  2. रिसॉर्ट में बंदूकधारी निजी गार्डों की मौजूदगी चिंताजनक।

  3. चीतल शिकार से वन्यजीव सुरक्षा पर सवाल उठे।

संजय कुमार शर्मा, पन्ना। पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में कथित अवैध रिसॉर्ट और उसके आसपास की गतिविधियों ने एक बार फिर वन्यजीव संरक्षण और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छतरपुर जिले के राजगढ़ गांव स्थित खसरा नंबर 1841 की करीब पांच एकड़ भूमि पर बने एक आलीशान रिसॉर्ट में बंदूकधारी निजी गार्डों की तैनाती सामने आने के बाद मामला सुर्खियों में है। उल्लेखनीय है कि वन विभाग इस रिसॉर्ट को पहले ही अवैध घोषित कर चुका है, लेकिन अब तक इसके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

जानकारी के अनुसार यह रिसॉर्ट वरिष्ठ आईआरएस अधिकारी बी. श्रीनिवास कुमार और उनकी पत्नी हिमानी सरद द्वारा निर्मित कराया गया है।

चीतल शिकार की घटना ने बढ़ाई चिंता

बताया जा रहा है कि रिसॉर्ट से कुछ दूरी पर स्थित पन्ना टाइगर रिजर्व के चंद्रनगर कोर क्षेत्र में करीब 15 दिन पहले शिकारियों ने गोली मारकर एक चीतल का शिकार कर लिया था। इस घटना के बाद कोर क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर सवाल उठने लगे हैं।

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि जिस क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, वहां निजी हथियारबंद गार्डों की मौजूदगी और हाल में हुई शिकार की घटना गंभीर चिंता का विषय है।

बाघों की वापसी की सफलता पर खतरे की आशंका

पन्ना टाइगर रिजर्व देश में बाघ संरक्षण की सबसे सफल परियोजनाओं में गिना जाता है। वर्ष 2002 में यहां 30 से अधिक बाघ थे, लेकिन शिकार और निगरानी में कमी के कारण वर्ष 2008 तक उनकी संख्या घटकर 18 रह गई थी। वर्ष 2009 की शुरुआत में यह टाइगर रिजर्व पूरी तरह बाघविहीन हो गया था।

इसके बाद वन विभाग, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयासों से यहां बाघों का पुनर्वास किया गया। वर्तमान में पन्ना टाइगर रिजर्व में 80 से अधिक बाघ मौजूद हैं, जिसे देश में वन्यजीव संरक्षण की बड़ी सफलता माना जाता है।

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वन्यजीव कार्यकर्ता ने उठाए कानूनी सवाल

वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे का कहना है कि टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में हथियार रखना नियमों के विरुद्ध है। उनका दावा है कि वहां हथियार लेकर रहने वाले लोगों के पास पुलिस या प्रशासन की वैध अनुमति नहीं है।