पन्ना टाइगर रिजर्व में गड़े धन की तलाश! कोर एरिया में मेटल डिटेक्टर-GPS लेकर पहुंचे 4 लोगों को वनकर्मियों ने दबोचा
पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में गड़े धन की तलाश कर रहे चार लोगों को मेटल डिटेक्टर और जीपीएस ...और पढ़ें

पीटीआर के कोर एरिया में चार संदिग्धों को वनकर्मियों ने पकड़ा।
HighLights
पन्ना टाइगर रिजर्व में गड़े धन की तलाश करते पकड़े गए चार लोग।
आरोपितों के पास से मेटल डिटेक्टर और जीपीएस उपकरण बरामद हुए।
वन विभाग ने मामला दर्ज कर चारों को न्यायिक हिरासत में भेजा।
डिजिटल डेस्क, जबलपुर। पन्ना टाइगर रिजर्व के प्रतिबंधित कोर एरिया में वन्यजीवों की सुरक्षा को चुनौती देते हुए चार लोग गड़ा हुआ पुराना धन और कीमती धातुएं तलाशने पहुंच गए। वन विभाग की गश्ती टीम ने चारों को संदिग्ध गतिविधि करते हुए मौके से पकड़ लिया। आरोपितों के पास से मेटल डिटेक्टर और जीपीएस उपकरण बरामद किए गए हैं। घटना ने रिजर्व के संवेदनशील क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
कोर एरिया में घुसकर कर रहे थे संदिग्ध गतिविधि
वन विभाग के मुताबिक, 5 अक्टूबर 2026 को पन्ना टाइगर रिजर्व के चंद्रनगर परिक्षेत्र की राजगढ़ बीट में गश्त के दौरान अमले को सूचना मिली कि कुछ लोग प्रतिबंधित कोर क्षेत्र में अवैध रूप से प्रवेश कर संदिग्ध गतिविधियां कर रहे हैं। सूचना मिलते ही वनकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और चारों को हिरासत में ले लिया।
मेटल डिटेक्टर और GPS से तलाश रहे थे खजाना
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि वे कोर क्षेत्र में जमीन में गड़े पुराने धन और कीमती धातुओं की तलाश में आए थे। इसके लिए उनके पास मेटल डिटेक्टर मशीन थी, जबकि स्थान की पहचान और लोकेशन ट्रैक करने के लिए जीपीएस डिवाइस का इस्तेमाल किया जा रहा था। वन विभाग ने दोनों उपकरण जब्त कर लिए हैं।
चारों के खिलाफ वन अपराध दर्ज
वन विभाग ने मामले में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की संबंधित धाराओं के तहत वन अपराध प्रकरण (पीओआर) दर्ज किया है। पकड़े गए आरोपितों की पहचान बिहारी पटेल (35), निवासी टपरियन, राजनगर, छतरपुर; चंद्रिका प्रसाद तिवारी (42), निवासी इंद्रपुरी कॉलोनी, पन्ना; छोटेलाल राजपूत (46), निवासी तिंदवारा, बांदा (उत्तर प्रदेश); और ओम नरेंद्र कोरी (26), निवासी मुरारपुर, नरैनी, बांदा (उत्तर प्रदेश) के रूप में हुई है।
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न्यायालय ने भेजा जेल
वन विभाग ने चारों आरोपितों को 6 अक्टूबर को राजनगर न्यायालय में पेश किया। न्यायालय के आदेश के बाद सभी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
अब वन विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि आरोपितों को यह जानकारी कहां से मिली कि रिजर्व के प्रतिबंधित कोर क्षेत्र में गड़ा धन हो सकता है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस पूरे मामले के पीछे केवल चार लोगों की योजना थी या फिर किसी बड़े गिरोह की भूमिका है।
