अतुल शुक्ला, जबलपुर: जबलपुर के ज्ञान गंगा निजी इंजीनियरिंग कालेज के मैकेनिकल, कंप्यूटर साइंस और इलेक्ट्रिकल के विद्यार्थियों ने एक ऐसा ग्रीन रोबोट तैयार किया है, जिसकी मदद से पौधे लगाने का काम आसान होगा। इसकी खासियत यह है कि यह पूरी तरह से बैटरी व मोबाइल एप से संचालित होता है। यह गूगल मैप पर दिखाई लोकेशन पर जाकर पौधे लगा सकता है। इसे बनाने की लागत अभी करीब एक लाख रुपये आई है, मगर इस पर अभी और शोध किया जा रहा है, जिससे कि इसकी लागत को कम किया जा सके और किसानों के लिए इसे आसानी से उपलब्ध कराया जा सके।

शहर के निजी इंजीनियरिंग कालेज से मैकेनिकल कोर में पढ़ाई कर रहे प्रखर मणि त्रिपाठी बताते हैं कि उन्होंने एक साल पहले इसकी योजना बनाई और कालेज में साथ पढऩे वाले नौ विद्यार्थियों को इस मिशन में जोड़ा। इसके बाद टीम ने खेती की लागत को कम करने के लिए चार पहियों पर चलने वाला ग्रीन रोबोट तैयार किया है। इसकी खूबी की वजह से इसका पेटेंट करने के लिए आवेदन भी किया है।

ऐसे करता है काम

  • - रोबोट पर करीब 100 पौधे एक बार में रखे जा सकते हैं। इनका वजन अधिकतम 15 किग्रा तक हो सकता है।
  • - इसमें ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस ) लगा होता है, जिसके चलते दूर बैठा व्यक्ति मोबाइल एप के जरिये इसे वहां भेज सकता है, जहां पौैधे लगाने हैैं।
  • -चूंकि, अभी इसके खुद के मूवमेंट को ट्रक करने की सुविधा विकसित नहीं हुई है, ऐसे में इसे अपनी आंखों के सामने ही संचालित करना ज्यादा बेहतर होता है।
  • -इसमें लोहे का एक पाइप लगा होता है, जो सबसे पहले ड्रिल की तरह काम करते हुए चार इंच तक का गड्ढ़ा तैयार करता है।
  • -इसके बाद लोहे के दूसरे पाइप की मदद से गड्ढ़ा में पौधा रखा जाता है। कौन सा पौधा लगाना है, उसके लिए रोबोट को कमांड देने का सिस्टम इसमें लगा हुआ है।
  • - जिस पाइप के जरिये गड्ढ़ा खोदा गया था, उसी की मदद से पौधे के आस-पास मिट्टïी भरी जाती है।
  • -रोबोट में एक अन्य पाइप भी लगा होता है, जिसके जरिये पौधे को सींचा भी जाता है। रोबोट पर ही छोटा सा पानी का टैैंक भी होता है।
  • -यह कितनी भी दूरी से संचालित किया जा सकता है, क्योंकि इसको इंटरनेट के जरिये कमांड दी जाती है। रोबोट में मोबाइल सिम लगी होती है, जिसके जरिये ही इससे संपर्क स्थापित होता है।
  • - एक बार चार्ज करने पर यह लगभग डेढ़ से दो हजार पौधे लगा सकता है।

इस तरह से चलता है

रोबोट में 60-60 वाट की मोटर का उपयोग इसके चारों व्हील के साथ किया गया है। इससे कुल 240 वाट की मोटर की पावर इसको मिलती है। इसके अलावा इसमें 12 वोल्ट की बैटरी का उपयोग किया गया है। इससे खेत में ऊंचे-नीचे रास्ते में भी यह ठीक तरह से चल सकता है। जरूरत के अनुसार इसकी क्षमता को घटाया या बढ़ाया जा सकता है। मसलन, मोटर को जरूरत के हिसाब से बदला जा सकता है। अलबत्ता, टीम इसको अपग्रेड करने की कोशिश कर रही है। इसमें कैमरा लगाने और पावर बढ़ाए जाने पर काम किया जा रहा है।

टीम में ये हैं शामिल

टीम में प्रखर मणि त्रिपाठी के अलावा निशि पाटिल, प्रयाग जैन, आदित्य सिंह पटेल, गौरव पटेल, डा. वंदना रॉय, साक्षी नामदेव, सुरभि खुरसिया, डा. पूर्णिमा ब्यौहार शामिल हैं।

जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के तहत संचालित राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में देशभर के 30 प्रोजेक्ट का चयन किया गया है, जिसमें इनका रोबोट भी शामिल है। अब विवि के एग्री बिजनेस यूनिट में रोबोट तैयार करे वाले विद्यार्थियों को दो माह का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, जहां अनुभवी कृषि विज्ञानियों की मदद से ये रोबोट की खेती में उपयोगिता बढ़ाने और इसकी लागत कम करने पर काम कर रहे हैं। बाद में कृषि मंत्रालय इसे राष्ट्रीय स्तर पर परखेगा, जिसमें यह सफल रहा तो मंत्रालय इसे आगे बढ़ाने के लिए अनुदान भी देगा।

-डा. एसबी नहाटकर, प्रमुख, एग्री बिजनेस यूनिट, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय

कृषि के क्षेत्र पर संकट है। दूसरी पीढ़ी तैयार करना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में युवाओं को खेती के लिए आकर्षित करना जरूरी है। जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के विज्ञानी इस ओर तेजी से काम कर रहे हैं। इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए रोबोट को उपयोगी बनाने और उन्हें किसान तक पहुंचाने का काम चल रहा है। यह रोबोट खेती करने का तरीका बदल देगा।

-प्रो.प्रदीप बिसेन, कुलपति, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय

Edited By: Vijay Kumar