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MP में 27 साल बाद साल के जंगलों पर फिर मंडराया खतरा! बोरर कीट ने मचाई तबाही, 1.46 लाख पेड़ काटने की तैयारी

By Ashish ShuklaEdited By: Ravindra Soni
Published: Mon, 14 Sep 2026 06:34 PM (IST)

डिंडौरी के जंगलों में बेशकीमती साल के पेड़ों पर बोरर कीट का व्यापक हमला हुआ है, जिसके कारण केंद्र सरकार ...और पढ़ें

साल के पेड़ में कीट के प्रभाव को जांचते वन विभाग के अधिकारी। (सौ.वन विभाग)

साल के पेड़ में कीट के प्रभाव को जांचते वन विभाग के अधिकारी। (सौ.वन विभाग)

HighLights

  1. डिंडौरी के जंगलों में साल के पेड़ों पर बोरर कीट का हमला।

  2. 1.46 लाख प्रभावित पेड़ों की कटाई को मिली केंद्र से मंजूरी।

  3. स्वस्थ पेड़ों को बचाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।

आशीष शुक्ला, डिंडौरी। प्रदेश के डिडौरी जिले के जंगलों में बेशकीमती साल के पेड़ों पर बोरर कीट का व्यापक हमला हुआ है। वर्ष 1999 के बाद पहली बार ऐसा है, जब बड़े पैमाने पर पेड़ों को क्षति पहुंची है। केंद्र सरकार ने कीट के प्रकोप से प्रभावित एक लाख 46 हजार 784 साल के पेड़ों की कटाई को मंजूरी दे दी है।

वन विभाग के मुताबिक प्रभावित पेड़ सूख चुके हैं। यदि इन्हें समय रहते जंगल से नहीं हटाया गया तो कीट का प्रकोप दूसरे स्वस्थ साल के पेड़ों तक फैल सकता है, जिससे जंगल को और बड़ा नुकसान हो सकता है।

1999 में काटने पड़े से 15 लाख पेड़

इससे पहले 1999 में भी बोरर कीट का बड़ा प्रकोप देखा गया था। तब 15 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई करानी पड़ी थी। साल के पेड़ों को बचाने के लिए ही कीटों को मरवाने की इस वर्ष वन विभाग ने पहल की थी। ग्रामीणों की मदद से मारे गए 19 लाख 25 हजार से अधिक कीटों को वन विभाग 24 सितंबर को जलाएगा।

वैज्ञानिक ढंग से होगी कटाई

कटाई शुरू करने से पहले 16 सितंबर को कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इस कार्यशाला में डीएफओ, एसडीओ, रेंजर और डिप्टी रेंजर समेत पूरे वन अमले को वैज्ञानिक ढ़ंग से कटाई की प्रक्रिया समझाई जाएगी। इसमें सुरक्षा मानकों, लकड़ी के परिवहन, भंडारण और नीलामी की प्रक्रिया पर विशेष जोर दिया जाएगा।

एक अक्टूबर से प्रभावित पेड़ों की कटाई विधिवत रूप से शुरू होगी। अमरकंटक और छत्तीसगढ़ सीमा से लगे हुए तीन वन परिक्षेत्रों में बोरर कीट से सबसे अधिक नुकसान देखा गया है।

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पेड़ों को खोखला कर देता है बोरर कीट

बोरर कीट साल के पेड़ का सबसे बड़ा दुश्मन है। यह कीट पेड़ के तने में छेद कर अंदर घुस जाता है और उसे भीतर से खोखला कर देता है। कीट तने के अंदर अंडे देता है। वन विभाग के अनुसार जलवायु परिवर्तन, लंबे समय तक सूखा और जंगल में नमी की कमी के कारण इस कीट का प्रकोप बढ़ा है।

बोरर कीट से प्रभावित एक लाख 46 हजार 784 पेड़ चिह्नित किए गए हैं। जिन्हें काटने की अनुमति केंद्र सरकार से मिल गई है। जितने पेड़ कटेंगे उससे अधिक पेड़ लगाने की पहल वन विभाग द्वारा की जाएगी।
- भारती ठाकरे, डीएफओ-उत्पादन डिंडौरी।