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MP में 13 हजार चयनित अभ्यर्थियों पर संकट : फजी बोनस अंकों पर हाईकोर्ट की चोट, पुन: बनेगी शिक्षक भर्ती की मेरिट लिस्ट

Published: Thu, 14 May 2026 04:28 PM (IST)

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा-2025 में कथित गड़बड़ियों पर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने गैर-आरसीआई ...और पढ़ें

शिक्षक भर्ती (प्रतीकात्मक चित्र)

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संक्षेप में पढ़ें

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा-2025 में कथित गड़बड़ियों को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने कर्मचारी चयन मंडल और राज्य शासन को निर्देश दिए हैं कि गैर-आरसीआई डिप्लोमा धारक अपात्र अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया से बाहर कर नई मेरिट सूची तैयार की जाए। कोर्ट के इस आदेश से चयनित 13 हजार से अधिक उम्मीदवारों पर संकट गहरा गया है।

मामला उन उम्मीदवारों को दिए गए पांच प्रतिशत बोनस अंकों से जुड़ा है, जिन्होंने विशेष शिक्षा में डिप्लोमा होने का दावा किया था। भर्ती नियमों के अनुसार यह लाभ केवल भारतीय पुनर्वास परिषद (आरसीआई) से मान्यता प्राप्त डिप्लोमा धारकों को मिलना था, लेकिन आरोप है कि हजारों अभ्यर्थियों ने गलत जानकारी देकर बोनस अंक हासिल कर लिए।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि गलत जानकारी देकर लाभ लेने वाले उम्मीदवारों को बाद में अंक कम करवाने या विकल्प बदलने की छूट दी जाती है, तो यह ईमानदार अभ्यर्थियों के साथ अन्याय और बेईमानी को बढ़ावा देने जैसा होगा। कोर्ट ने उन अभ्यर्थियों की याचिकाएं भी खारिज कर दीं, जिन्होंने दावा किया था कि जल्दबाजी या त्रुटिवश उन्होंने बोनस अंक का लाभ ले लिया।

याचिका में उठे गंभीर सवाल

नरसिंहपुर निवासी सोनम अगरैया सहित अन्य अभ्यर्थियों ने याचिका दायर कर कहा था कि भर्ती विज्ञापन की कंडिका 7.7 के तहत केवल आरसीआई मान्यता प्राप्त विशेष शिक्षा डिप्लोमा धारकों को बोनस अंक मिलना था। इसके बावजूद लगभग 14,964 उम्मीदवारों ने खुद को पात्र बताकर अतिरिक्त अंक प्राप्त कर लिए।

याचिका में आरसीआई के आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि पूरे मध्य प्रदेश में आरसीआई पोर्टल पर केवल 2,194 कार्मिक और 3,077 पेशेवर ही पंजीकृत हैं। ऐसे में करीब 15 हजार उम्मीदवारों का विशेष शिक्षा प्रमाणपत्र धारक होना प्रथम दृष्टया संदिग्ध प्रतीत होता है।

विभाग को पहले ही मिली थी चेतावनी

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि लोक शिक्षण संचालनालय ने जनवरी 2026 में ही विभाग को आगाह किया था कि लगभग 18 हजार अभ्यर्थियों ने बोनस अंक के लिए “हां” विकल्प चुना है, जो असामान्य रूप से अधिक है। इसके बावजूद कर्मचारी चयन मंडल ने उम्मीदवारों से आरसीआई पंजीयन संख्या या प्रमाणपत्र का सत्यापन नहीं कराया।

आरोप है कि केवल ऑनलाइन डिक्लेरेशन के आधार पर सॉफ्टवेयर के जरिए बोनस अंक दे दिए गए, जिससे वास्तविक पात्र उम्मीदवारों की मेरिट नीचे चली गई और वे चयन सूची से बाहर हो गए।

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27 फरवरी की मेरिट सूची पर सवाल

याचिकाकर्ताओं ने 27 फरवरी 2026 को जारी मेरिट सूची को दोषपूर्ण बताते हुए उसे निरस्त करने और केवल वैध आरसीआई प्रमाणपत्र धारकों को बोनस अंक देकर नई सूची जारी करने की मांग की थी। मामले में 12 मई को अंतिम सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिस पर अब आदेश जारी किया गया है।