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MP हाई कोर्ट में वर्चुअल सुनवाई के दौरान अधिकारी का अनुचित आचरण, कोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी

Published: Wed, 28 Oct 2026 11:19 PM (IST)

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में वर्चुअल सुनवाई के दौरान एक अधिकारी बिस्तर पर लेटे और अनुचित वेशभूषा में दिखे, जिस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई।

सुनवाई के दौरान अनुचित पहनावे और आचरण पर हाई कोर्ट सख्त

सुनवाई के दौरान अनुचित पहनावे और आचरण पर हाई कोर्ट सख्त

HighLights

  1. वर्चुअल सुनवाई में अधिकारी बिस्तर पर लेटे, अनुचित वेशभूषा में दिखे।

  2. हाई कोर्ट ने अधिकारी के आचरण पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की।

  3. आपराधिक अवमानना और अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश जारी किए।

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बुधवार को प्रस्तुत हो रहा अधिकारी बिस्तर पर लेटा था और अंडरवियर पहने व कैमरे के सामने शर्ट के बटन बंद करता नजर आया। यह दृश्य देख न्यायमूर्ति दीपक खोत ने कड़ी नाराजगी जताई।

आपत्तिजनक आचरण करने वाले नगर तथा ग्राम निवेश विभाग भोपाल के संयुक्त संचालक अमित कुमार गजभिये से पूछा गया कि उनके विरुद्ध आपराधिक अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। साथ ही, राज्य शासन को उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई कर चार सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश भी दिए गए।

मेसर्स जीएसबी कंस्ट्रक्शन की अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नौ अक्टूबर को उक्त अधिकारी को अनुपालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।

इसका अनुपालन नहीं होने पर उन्हें उपस्थिति होने को कहा गया। इसके बाद अमित कुमार गजभिये वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये प्रस्तुत हुए थे। सुनवाई में भूमि के गलत वर्गीकरण का मुद्दा भी उठा।

याचिकाकर्ता ने तीन अक्टूबर के पत्र का हवाला दिया, जिसमें भूमि के मानचित्र और प्रकृति में सुधार की अनुशंसा की गई थी। विभागीय रिकार्ड में भूमि को औद्योगिक दर्ज किया गया, जबकि मास्टर प्लान में उसका उपयोग आवासीय निर्धारित था।

संयुक्त संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश, जबलपुर ने सुधार के लिए भोपाल स्थित संचालनालय के संयुक्त संचालक (आइटी) को अनुशंसा भेजी थी। इसके बावजूद प्रभावी सुधार नहीं हुआ।

अनुपालन प्रतिवेदन देखने के बाद कोर्ट ने संबंधित आदेश को महज दिखावा करार दिया। उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने आश्वस्त किया कि उक्त अधिकारी के विरुद्ध उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। अगली सुनवाई 30 नवंबर को होगी।

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