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देश की सबसे उम्रदराज बाघिन ’लंगड़ी’ ने पेंच रिजर्व में तोड़ा दम, 18 साल तक रही जंगल की रानी, 10 शावकों को जन्म देकर बढ़ाया बाघों का कुनबा

Published: Sun, 08 Mar 2026 03:32 PM (IST)

मप्र के पेंच टाइगर रिजर्व की मशहूर 'लंगड़ी' बाघिन का 18 वर्ष की आयु में प्राकृतिक कारणों से निधन हो ...और पढ़ें

लंगड़ी बाघिन (फाइल फोटो)

लंगड़ी बाघिन (फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। मध्य प्रदेश के सिवनी जिले स्थित पेंच टाइगर रिजर्व की मशहूर और देश की सबसे उम्रदराज बाघिनों में शामिल ‘लंगड़ी’ बाघिन (PN-20/T-20) ने शनिवार को अंतिम सांस ली। कर्माझिरी कोर क्षेत्र में सुबह उसे मृत अवस्था में पाया गया। लगभग 18 वर्ष की उम्र में उसकी मौत प्राकृतिक कारणों से हुई बताई जा रही है।

साल 2008 में जन्मी इस बाघिन ने अपने लंबे जीवनकाल में पेंच के जंगलों में खास पहचान बनाई। पर्यटकों के बीच वह ‘लंगड़ी बाघिन’ के नाम से प्रसिद्ध थी और पेंच आने वाले वन्यजीव प्रेमियों के लिए हमेशा आकर्षण का केंद्र रही।

कॉलरवाली की बहन थी लंगड़ी

पेंच टाइगर रिजर्व के उप संचालक पुनीत गोयल के अनुसार लंगड़ी बाघिन विश्व प्रसिद्ध ‘कॉलरवाली’ बाघिन की बहन थी। कॉलरवाली को भी पेंच की सबसे चर्चित बाघिनों में गिना जाता था, जिसने 17 वर्ष की आयु में दम तोड़ा था।

10 शावकों को जन्म देकर बढ़ाई बाघों की संख्या

लंगड़ी बाघिन ने अपने जीवनकाल में 10 शावकों को जन्म दिया, जिससे पेंच टाइगर रिजर्व और आसपास के जंगलों में बाघों की संख्या बढ़ाने में उसका अहम योगदान रहा। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार कर्माझिरी परिक्षेत्र के लगभग 70 प्रतिशत इलाके में उसका विचरण रहा।

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जन्मजात विकृति के कारण पड़ा ‘लंगड़ी’ नाम

वन अधिकारियों के मुताबिक उसके आगे के पंजे में जन्मजात विकृति थी, जिसके कारण वह हल्का लंगड़ाकर चलती थी। इसी वजह से पर्यटकों ने उसे प्यार से ‘लंगड़ी बाघिन’ नाम दे दिया था।

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शुक्रवार को पर्यटकों ने उसे आखिरी बार जंगल में देखा था। शनिवार सुबह उसकी मौत की पुष्टि हुई। इसके बाद रिजर्व प्रबंधन ने भावभीनी विदाई देते हुए वन्यजीव प्रोटोकॉल के तहत उसका सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार किया।

लंबे समय तक पेंच के जंगलों की शान रही इस बाघिन के जाने से वन्यजीव प्रेमियों और वन अमले में शोक का माहौल है।