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शोध के पैसों से की 24 यात्राएं, कार-एसी खरीदे; जबलपुर के पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय में फर्जीवाड़ा उजागर

Published: Sun, 11 Jan 2026 06:48 AM (IST)Updated: Sun, 11 Jan 2026 06:49 AM (IST)

जबलपुर के नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय में पंचगव्य शोध के करोड़ों रुपये के दुरुपयोग का खुलासा हुआ है। गाय ...और पढ़ें

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जेएनएन, जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय में पंचगव्य शोध के नाम पर करोड़ों रुपये की राशि के दुरुपयोग का मामला सामने आया है।

जिस योजना का उद्देश्य गाय के दूध, गोबर और गोमूत्र से जनहितकारी उत्पाद विकसित करना था, उसकी राशि से जिम्मेदारों ने कार, एसी, फ्रिज सहित अन्य सुविधाजनक वस्तुएं खरीद ली। संभागायुक्त धनंजय ¨सह ने जांच के निर्देश दिए थे।

रिपोर्ट के अनुसार, पंचगव्य अनुसंधान योजना में वाहन खरीदी का कोई प्रविधान नहीं था। इसके बावजूद करीब 7.39 लाख रुपये की कार खरीदी गई। इतना ही नहीं, पेट्रोल-डीजल पर लगभग तीन लाख और वाहन मरम्मत के नाम पर दो लाख, 76 हजार रुपये खर्च कर दिए गए।

इसमें यात्रा व्यय का भी कोई प्रविधान नहीं था, फिर भी 24 यात्राओं में करीब तीन लाख रुपये खर्च कर दिए गए। इनमें से दो लाख 73 हजार रुपये का खर्च एक ही अधिकारी के नाम पर दर्ज है। वर्ष 2011 से 2018 के बीच शासन से मिले 3 करोड़ 50 पचास रुपये में से प्रशासनिक व्यय की सीमा महज एक प्रतिशत थी।

जांच में सामने आया कि करीब 60 लाख रुपये शोध के बजाय अधिकारियों की सुख-सुविधाओं पर खर्च किए गए हैं। योजना के तहत पांच उत्पादन इकाइयों में मशीनरी पर 1.92 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन उत्पाद बिक्री से आय मात्र 23 हजार रुपये रही। जांच रिपोर्ट संभागायुक्त के पास पहुंच चुकी है, जिम्मेदारों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है।

1.92 करोड़ मशीनों पर खर्च किए जांच रिपोर्ट से साफ हुआ कि पंचगव्य योजना के अंतर्गत निर्माण इकाई को पांच भागों में बांटा गया था। इसमें गोमूत्र स्त्रायण इकाई, मच्छर कुंडली निर्माण इकाई, कच्चा पदार्थ प्रसंस्करण इकाई, टिकिया उत्पादन इकाई, गोबर गमला निर्माण इकाई शामिल थीं।

इन इकाइयों में एक करोड़ 92 लाख छह हजार 584 रुपयों का व्यय मशीन खरीदने पर किया गया। मशीनों से सामग्री का निर्माण भी किया जाना था, जिसे बेचकर महज 23 हजार 715 प्राप्त हुए।

योजना के अंतर्गत कंप्यूटर, टेबलेट, टोनर, प्रोजेक्टर इन्सटेलेशन, एसी, फर्नीचर, फ्रिज, अन्य इलेक्ट्रानिक आइटम व अन्य मदों को सम्मिलित कर 14 लाख 9 हजार 732 रुपयों का व्यय किया गया। जबकि, कंप्यूटर, टेबलेट व इसी प्रकार अनावश्यक सामग्री योजना प्रारूप अनुसार आवश्यक नहीं थे, जिन्हें क्रय किया जाना भी वित्तीय हानि बताई गई है।