जबलपुर में किशोरी की आत्महत्या के केस में 10 दिन जेल में रहा शिक्षक; विभाग को भनक तक नहीं, मेडिकल लीव से छिपाई गैरहाजिरी
शिक्षक संतोष पटेल ने किशोरी आत्महत्या मामले में अपनी गिरफ्तारी और जेल की जानकारी शिक्षा विभाग से छिपाई। मेडिकल लीव ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।
HighLights
शिक्षक ने किशोरी आत्महत्या मामले में गिरफ्तारी और जेल की बात छिपाई।
मेडिकल लीव का बहाना बनाकर 10 दिन जेल में बिताए, जमानत पर छूटा।
स्कूल के प्राचार्य के पत्र से शिक्षा विभाग को मामले की जानकारी मिली।
डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किशोरी की आत्महत्या के मामले में आरोपित सरकारी शिक्षक संतोष कुमार पटेल की गिरफ्तारी और करीब दस दिन जेल में रहने की जानकारी शिक्षा विभाग से छिपाए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि शिक्षक ने गैरहाजिरी के दौरान स्कूल में मेडिकल लीव दर्ज कराई और जमानत मिलने के बाद दोबारा स्कूल पहुंचकर पढ़ाना शुरू कर दिया। विभाग को इसकी जानकारी स्कूल की प्राचार्य के पत्र के माध्यम से मिली।
पुलिस जांच में सामने आया है कि किशोरी को पंचायत में बुलाकर उसके चरित्र और गतिविधियों को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक बातें कही गई थीं। उस पर चोरी समेत अन्य आरोप लगाए गए और अपमानजनक शब्दों के इस्तेमाल की बात भी जांच में सामने आई है। इसके बाद किशोरी ने जहरीला पदार्थ खा लिया था। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
19 अगस्त को हुई थी शिक्षक की गिरफ्तारी
मामले में शिक्षक संतोष कुमार पटेल को 19 अगस्त 2026 को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। करीब दस दिन बाद जमानत मिलने पर वह बाहर आया और इसके बाद सगड़ा-छपनी स्कूल में फिर से ड्यूटी करने लगा। आरोप है कि शिक्षक ने गिरफ्तारी और जेल जाने की जानकारी शिक्षा विभाग के अधिकारियों को नहीं दी।
गिरफ्तारी से पहले स्कूल में उसकी अनुपस्थिति मेडिकल लीव के तौर पर दर्ज की गई थी। जमानत पर रिहा होने के बाद उसने स्कूल में दोबारा उपस्थिति दर्ज करा दी।
प्राचार्य के पत्र से खुला मामला
शिक्षक के संबंध में जानकारी तब सामने आई, जब सगड़ा-छपनी स्कूल की प्राचार्य ने जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र भेजा। बताया गया कि शिक्षक ने स्कूल में आवेदन देकर अपने खिलाफ पारिवारिक विवाद के चलते झूठा प्रकरण दर्ज किए जाने की बात कही थी।
प्राचार्य ने उपलब्ध जानकारी के आधार पर शिक्षक की गिरफ्तारी, जेल भेजे जाने और जमानत पर रिहा होने की जानकारी विभाग को भेजी। यह पत्र 8 सितंबर को डीईओ कार्यालय पहुंचा। इसके बाद शिक्षा विभाग को शिक्षक की गिरफ्तारी की जानकारी हुई। जिला शिक्षा अधिकारी गौतम बर्वे ने भी माना कि शिक्षक के जेल जाने की जानकारी उन्हें पहले नहीं थी।
पंचायत में किशोरी पर लगाए गए थे गंभीर आरोप
पुलिस की जांच के अनुसार, 19 अक्टूबर 2025 को संतोष पटेल समेत राममिलन पटेल, अशोक पटेल और राजेश पटेल ने किशोरी के रिश्तेदारों और परिवार के सदस्यों को बुलाकर पंचायत की थी।
जांच में पंचायत के दौरान किशोरी के चरित्र और उसकी गतिविधियों को लेकर सवाल उठाए जाने की बात सामने आई है। बताया गया कि 15 अक्टूबर को कैमरा लगाकर तैयार किया गया एक वीडियो भी पंचायत में दिखाया गया था।
किशोरी और उसके माता-पिता की मौजूदगी में उस पर चोरी सहित अन्य आरोप लगाने और आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करने की बात पुलिस जांच में सामने आई है। पिता से कथित तौर पर तीन लाख रुपये हर्जाने की मांग करने की धमकी दिए जाने का आरोप भी है।
यह भी पढ़ें- MP में बिजली बिल फिर बढ़ाएगा उपभोक्ताओं की टेंशन! FPPAS की दर 4.59% से बढ़कर 5.063%, जानें कितनी बढ़ेगी राशि
पंचायत के बाद मामा के घर भेजा
घटना के बाद परिजनों ने किशोरी को कुछ समय के लिए उसके मामा के घर भेज दिया था। 10 नवंबर 2025 को किशोरी ने वहां जहरीला पदार्थ खा लिया। तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे बरगी स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। प्राथमिक उपचार के बाद उसे जबलपुर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
किशोरी की मौत के बाद लार्डगंज थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की। बाद में घटनास्थल बरगी पुलिस चौकी क्षेत्र में आने के कारण जांच बरगी पुलिस को सौंप दी गई। लार्डगंज और बरगी पुलिस ने मामले की जांच की।
2015 से स्कूल में पदस्थ है शिक्षक
संतोष कुमार पटेल 7 अप्रैल 2015 से सगड़ा-छपनी स्कूल में पदस्थ है और राजनीतिक विज्ञान पढ़ाता है। गिरफ्तारी से पहले उसने मेडिकल लीव का आवेदन दिया था। जेल से जमानत पर बाहर आने के बाद उसने स्कूल में फिर उपस्थिति दर्ज कराई।
अब विभागीय स्तर पर यह भी जांच का विषय है कि किसी शासकीय कर्मचारी के आपराधिक मामले में गिरफ्तार होकर जेल जाने पर संबंधित विभाग को सूचना देने की प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं।
डीईओ बोले- कराएंगे जांच
जिला शिक्षा अधिकारी गौतम बर्वे ने बताया कि शिक्षक संतोष पटेल की गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने की जानकारी उन्हें पहले नहीं थी। स्कूल की ओर से भेजे गए पत्र के बाद इसकी जानकारी सामने आई। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
