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'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद धनुष तोप की बढ़ी धमक : जबलपुर में 100 नवीन माउंटेन गन सिस्टम का निर्माण शुरू

Published: Mon, 16 Feb 2026 03:34 PM (IST)

'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद धनुष तोप की मांग बढ़ी है। जबलपुर की गन कैरिज फैक्ट्री अगले छह महीनों में 100 ...और पढ़ें

जबलपुर में स्थित गन कैरिज फैक्ट्री (फाइल फोटो)

जबलपुर में स्थित गन कैरिज फैक्ट्री (फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। 'ऑपरेशन सिंदूर' में अपनी प्रभावी भूमिका के बाद स्वदेशी धनुष तोप की मांग में तेजी आई है। लिहाजा, जबलपुर स्थित गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) अब रक्षा उत्पादन को नई गति देते हुए अगले छह महीनों में 100 आधुनिक माउंटेन गन सिस्टम तैयार करेगी।

अब तक 38 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम धनुष तोप को अपग्रेड कर 44 से 46 किलोमीटर रेंज तक सटीक प्रहार करने योग्य बनाया जा रहा है। वर्तमान में 155 मिमी 45 कैलिबर में उपलब्ध यह तोप नए संस्करण में 52 कैलिबर क्षमता के साथ नजर आएगी। निर्माणी ने इसके लिए विशेष रूप से नया प्लांट विकसित किया है, जहां अत्याधुनिक तकनीक से इसका निर्माण होगा।

पहाड़ी इलाकों के लिए खास माउंटेन गन सिस्टम

नई माउंटेन गन सिस्टम को वाहन पर आसानी से ले जाया जा सकेगा और यह चारों दिशाओं में घूमकर फायरिंग करने में सक्षम होगी। इससे दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों में सेना की मारक क्षमता और लचीलापन दोनों बढ़ेंगे।

धनुष 155 मिमी 45 कैलिबर की आधुनिक आर्टिलरी गनों में प्रमुख है। इसके लगभग 81 प्रतिशत पुर्जे स्वदेशी हैं और लक्ष्य इसे बढ़ाकर 91 प्रतिशत तक ले जाने का है।

पोजिशन बदलने में माहिर

इस आर्टिलरी गन की खासियत इसकी तीव्र फायरिंग क्षमता है। यह 13 सेकंड में तीन राउंड दाग सकती है और फायरिंग के तुरंत बाद अपनी पोजिशन बदलने में सक्षम है, जिससे दुश्मन के काउंटर अटैक से बचाव होता है। लगभग 13 टन वजनी यह तोप रात में भी सटीक निशाना साध सकती है।

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निर्माताओं ने स्पष्ट किया है कि इसे बोफोर्स का अपग्रेडेड वर्जन कहना सही नहीं होगा, हालांकि कुछ फंक्शन समान हो सकते हैं। भारतीय सेना ने कुल 414 गनों की मांग रखी है।

पूरी तरह देश में विकसित 

1990 के दशक में बोफोर्स सौदे के बाद यह पहली बड़ी स्वदेशी आर्टिलरी गन है जिसे सेना को बड़े पैमाने पर सौंपा जा रहा है। धनुष पर कार्य 2012 में शुरू हुआ था। इसमें उन्नत कम्युनिकेशन सिस्टम और आधुनिक तकनीक का समावेश किया गया है।

प्रमुख विशेषताएं

  • प्रति मिनट 3 राउंड की दर से डेढ़ घंटे तक लगातार फायरिंग की क्षमता।
  • आवश्यकता पड़ने पर 12 राउंड प्रति मिनट तक फायरिंग।
  • 46.5 किलोग्राम वजनी गोला दागने में सक्षम।

स्वदेशी रक्षा उत्पादन की दिशा में धनुष तोप भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता और सैन्य ताकत का मजबूत प्रतीक बनकर उभरी है।